बधियाकरण करने की भी मिली कानूनी मंजूरी

भोपाल,23 मई,नभासं.राज्य में तकरीबन पन्द्रह साल के बाद करीब बीस हजार गौ-सेवकों को उपचार का कानूनी अधिकार मिल गया है. केन्द्र सरकार के भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 के तहत मप्र सरकार ने पशुपालन विभाग में रजिस्ट्रिकृत समस्त गौ-सेवकों को लघु पशु चिकित्सा सेवायें देने की अनुज्ञा प्रदान कर दी है.

इधर, राज्य में प्रशिक्षित गौ-सेवक तैयार करने की योजना 2 अक्टूबर,1997 से प्रारंभ की गई है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वरोजगार के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है. योजना के अन्तर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में कक्षा दसवीं उत्तीर्ण एक स्थानीय बेरोजगार युवक को छ: माह का प्रशिक्षण दिया जाता है. उक्त प्रशिक्षित गौ-सेवक अपने ग्राम पंचायत क्षेत्र में पशुओं को प्राथमिक उपचार प्रदान कर पशुपालकों से शुल्क प्राप्त करता है. वर्ष 2011-12 माह दिसम्बर तक कुल 19 हजार 886 गौ-सेवकों को प्रशिक्षित किया गया था. उन्हें मोबाईन फोन की सुविधा दी जाती है जिससे वे वेटनरी डाक्टर के परामर्श से पशु चिकित्सा सुविधायें प्रदान करते हैं.

मंत्री अजय विश्रोई के प्रभार वाले पशुपालन विभाग द्वारा प्रदेश के गौ-सेवकों को रजिस्ट्रीकृत पशु चिकित्सा व्यवसायी के पर्यवेक्षण तथा निदेशन के अधीन लघु पशु चिकित्सा सेवायें देने के कानूनी अधिकार प्रदान किये गये हैं. पशुपालन विभाग के आदेश के तहत अब राज्य के गौ-सेवक आम पशु रोगों का उपचार जिसमें प्राथमिक पशु चिकित्सा सहायता देना भी सम्मिलित है,दे सकेंगे. इसके अलावा वे सभी प्रकार के पशु रोग निरोधक टीके लगाने एवं रोग निरोधक उपचार भी कर सकेंगे. गौ-सेवकों को बधियाकरण (सांड को बैल बनाना) करने का भी कानूनी अधिकार दिया गया है. पशुपालन विभाग ने हालिया आदेश में उन्हें ये हक प्रदान किया है.

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