नई दिल्ली, 8 फरवरी. कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को कहा कि मौजूदा राशन व्यवस्था में आमुलचूल बदलाव लाये बिना प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करना मुश्किल होगा.

पवार ने बुधवार को यहां राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के खाद्य एवं कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून को को यदि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की मौजूदा प्रणाली के जरिए ही लागू करने की कोशिश की जाती है तो यह लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाएगा. मैं यदि इस तथ्य पर जोर न डालूं तो यह अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतना होगा. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रस्तावित कानून के अनुरूप बनाने के लिए भारी बदलाव की जरूरत है.

खाद्य सुरक्षा कानून का लक्ष्य है 63.5 फीसदी आबादी को सस्ती दर पर अनाज मुहैया कराना. विधेयक दिसंबर 2011 में संसद में पेश कर दिया गया और इसे स्थायी समिति के पास भेज दिया गया. पवार ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर डाला लेकिन साथ ही मौजूदा पीडीएस की सीमाओं पर भी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि एक आम धारणा है कि मुझे खाद्य सुरक्षा कानून के बारे में कुछ संदेह है. हालांकि संदेह की बात छोड़ दें तो इससे इनकार नहीं कर सकते कि एक कल्याणकारी देश के तौर पर ऐसा समय आ गया है कि इस देश के हर नागरिक को कम से कम दो जून का भोजन मिले. उन्होंने कहा कि मेरी एक ही चिंता है कि मौजूदा प्रणाली इस कानून के मूल भाव के अनुरूप होगी या नहीं. पवार ने मौजूदा पीडीएस की गंभीर सीमाओं का जिक्र किया जैसे कि मंडियों की क्षमता, राज्य की एजेंसियों की वित्तीय स्थिति, कर्मचारी, भंडारण आदि. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के बारे में पवार ने कहा कि पूरे देश के लिए एक केंद्रीय प्रणाली अच्छा विचार नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने से पहले हर राज्य को मिशन की तरह प्रणाली में सुधार करना चाहिए.

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