भारत के शहरी रोजगार अवसरों में 20 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है. शहरी रोजगारों में अधिकांश रोजगार उद्योगों व दफ्तरों की नौकरियों में होते हैं. कुछ लोग स्वयं रोजगार में आते हैं. इसका एक बड़ा कारण यह है कि बैंकों की ब्याज दरों में बढ़ोतरी और निवेश में कमी से औद्योगिक मेन्यूफेक्चरिंग क्षेत्र में भारी गिरावट आई है. आटोमोबाइल क्षेत्र में कार, ट्रक, दुपहिया वाहनों का निर्माण कम किया गया है. इसकी ग्राहकी कम होती जा रही थी. इसी संदर्भ में वित्त मंत्री श्री चिदम्बरम ने बैंकों से कहा है कि ऐसे कर्जों पर कर्ज लौटाने की दर (ई.एम.आई.) में कमी लाएं, जिससे लोग इन्हें खरीदने के लिए आगे आ सकें.

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार खेती, खेतिहर मजदूरी और पशुओं के जरिए दूध व बैलगाड़ी का यातायात होता है. शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसे ही लोग ज्यादार आते हैं जहां खेती पर पूरा परिवार निर्भर नहीं कर सकता. कुछ लोग गांव में रहकर उनकी जमीन पर खेती करते हैं शेष शहरों में जाकर मजदूरी, रिक्शा चलाना व उद्योगों में काम करते हैं. खेतिहर मजदूर का काम खेती के हिसाब से मौसमी होता है. जब काम नहीं होता तो उन्हें खाली बैठना पड़ता है. खेतिहर मजदूर असंगठित क्षेत्र का देश का सबसे बड़ा वर्ग है. इनकी मजदूरी काफी कम और अनियमित होती है. ग्रामीण क्षेत्र का यह सबसे निर्धन वर्ग होता है. मनरेगा ने इस सबसे उपेक्षित वर्ग को रोजगार की गारंटी से सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाया है. बिना किसी श्रमिक आंदोलन के इन लोगों की मजदूरी में इजाफा हो गया है. अब किसान भी इन खेतिहर मजदूरों को खेती के काम के लिये मनरेगा से भी ज्यादा मजदूरी देने के लिये बाध्य हो गये हैं. मनरेगा के कारण अब यह शिकायत आने लगी है कि खेती के लिये मजदूर नहीं मिल रहे हैं. वे ज्यादा मजदूरी मांगते हैं.

शहरों में सूचना टेक्नोलॉजी, शिक्षा, बैंक, बीमा अन्य वित्तीय संस्थानों व आटोमोबाइल क्षेत्र ने काफी रोजगार के अवसर दिये हैं. शिक्षा के क्षेत्र में 41 प्रतिशत रोजगार के अवसर बढ़े हैं. शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सर्व शिक्षा अभियान के लिये बड़े पैमाने पर स्कूल खोले जा रहे हैं. लाखों लोगों को शिक्षक के तौर पर भर्ती किया जा रहा है. केन्द्रीय सरकार ने बैंकों पर बाध्यता कायम की है कि उन्हें अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शाखायें खोलनी होंगी और अधिकांश लोगों को बैंक खाता प्रणाली में शामिल किया जाए. बैंकों में भी रोजगार के अवसर काफी बढ़ रहे हैं.

रोजगार के क्षेत्र में सबसे बड़ी गिरावट औद्योगिक क्षेत्र में देखी जा रही है. निवेश व पून्जी की कमी और बैंकों की ब्याज दरों में बहुत तेजी होने से निवेश कम हो गया. दूसरी ओर महंगाई और मुद्रास्फीति लगातार बढऩे से लोगों की क्रयशक्ति कम होने से बड़े सामान (ड्यूरेबिल गुड्स) का उठाव रूक सा गया है. कई ऐसे उद्योगों को उत्पादन कम करना पड़ रहा है जिससे उनकी आमदनी घटते जाने से बन्द होने की कगार पर आ गये है. श्री चिदम्बरम ने इनके बारे में भी चिन्ता व्यक्त की है, लेकिन जब तक आम लोगों को महंगाई से छुटकारा नहीं मिलेगा, बड़े सामानों की खरीद पर प्रतिकूल प्रभाव बना ही रहेगा.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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