अन्ना ने अनशन समाप्त कर दिया और आभास यह भी होता है कि उन्होंने अनशन को हमेशा के लिए त्याग दिया. दिल्ली के गत अप्रैल में जंतर मंतर पर अनशन के बाद वे लगातार कहते रहे कि यदि मजबूत लोकपाल विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पारित नहीं हुआ तो वे फिर से अनशन पर बैठेंगे. संसद में जिस दिन विधेयक पेश हुआ उसी दिन यह कहा कि यह ”मजबूत” नहीं है इसलिए वे मुम्बई में अनशन पर बैठ गए. उसके बाद जेल भरो आंदोलन और उसके भी बाद विधानसभा चुनाव वाले 5 राज्यों में कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार करेंगे.

दूसरा अनशन प्रारंभ करने से कुछ दिन पहले उन्होंने यह भी कहा कि वे दिल्ली में जेल भरो आंदोलन में बाबा रामदेव से सहयोग कर आंदोलन चलाएंगे. मुंबई में आंदोलन खत्म करते ही उन्होंने कहा कि उन्हें बंगलौर से श्री श्री रविशंकर का फोन आया है कि भ्रष्टाचार के मामले पर हम साथ मिलकर संघर्ष करेंगे. दिल्ली अनशन से मुंबई अनशन के बीच बाबा रामदेव काले धन पर और भाजपा नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अलग-अलग रथ यात्राएं कर चुके हैं. अब श्री अन्ना हजारे ने अनशन के साथ-साथ उनका जेल भरो आंदोलन भी समाप्त कर दिया. यह उनकी मुहिम का दूसरा चरण था. अब वे सीधे अपने तीसरे चरण पर जा रहे हैं- जो कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव प्रचार करना है.  इसमें उन्होंने यह भी प्रगट कर दिया कि यह प्रचार केवल कांग्रेस के विरुद्ध होगा क्योंकि उन्हें अन्य दलों से कोई शिकायत नहीं है. कांग्रेस और मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें लोकपाल विधेयक पर बार-बार धोखा दिया है और कमजोर लोकपाल विधेयक लाए हैं.

यह भी महसूस किया जा रहा है कि अन्ना हजारे का मुद्दा भ्रष्टाचार व अनशन नहीं बल्कि राजनीतिक है. कांग्रेस के महामंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने कुछ दिनों पूर्व ही यह अनुमान लगाया था कि रामदेव बाबा, श्री रविशंकर महाराज और अन्ना हजारे कांग्रेस के विरुद्ध लोकपाल की आड़ में दुष्प्रचार व चुनाव प्रचार की श्रृंखला चला रहे हैं. अब अन्ना ने यह भी खुलासा कर दिया है कि उनका यह कांगेस विरोधी चुनाव प्रचार अभियान इन राज्यों में चुनाव खत्म हो जाने के बाद भी आगामी लोकसभा चुनाव 2014 तक जारी रहेगा. उनके अनशन के दूसरे दौर में जनसमर्थन, जन उन्माद नहीं दिखाई दिया. अप्रैल में जहां उनका जंतर मंतर स्थल हमेशा खचाखच भरा रहता था और देश में उनके समर्थक लोग और उनके बयान आ रहे थे. वह इस दौर में सब नदारद रहे. अन्ना के द्वितीय चरण आंदोलन में उनकी बड़ी किरकिरी हो गयी है. अब लोगों में यह भावना आ गई कि अन्ना का यह राजनैतिक हथकंडा था और उन्हें कांग्रेस से द्रोह है. यह उत्सुकता की बात है कि चुनाव प्रचार में अन्ना को कितना जनसमर्थन मिलता है या यहां भी उनकी और ज्यादा भद होने वाली है.

 

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