इस्लामाबाद,16 मई. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना का दोषी ठहराए जाने के बाद प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के भविष्य का फैसला संसद के निम्न सदन नेशनल असेंबली की महिला स्पीकर फहमिदा मिर्जा के हाथ में है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना मामले में गिलानी के खिलाफ दिए गए फैसले के बाद प्रधानमंत्री का भविष्य तय करने के लिए स्पीकर के पास तीन विकल्प हैं. पहला इसे चुनाव आयोग के पास सीधे भेज दें. दूसरा, वह चुनाव आयोग को 90 दिनों में निर्णय लेने देने की छूट दें. तीसरा, प्रधानमंत्री को अयोग्य ठहराए जाने की मांग खारिज कर दें.  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पीकर ने कहा था कि उन्हें संसद व जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है.  लोग यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि स्पीकर सही निर्णय लेंगी. पिछले चार वर्षो से वह निष्पक्ष होकर काम कर रही हैं. अब प्रधानमंत्री के संदर्भ को आगे बढ़ाना उनकी निष्पक्षता की असली परीक्षा होगी. अपने बयान में स्पीकर ने गिलानी से दूरी बनाए रखने की कोशिश की है.

इससे पता चलता है कि वह कार्यपालिका के रबड़ स्टांप के तौर पर काम नहीं करेंगी. मिर्जा के निर्णय से प्रधानमंत्री का भविष्य तय होगा. लोगों को उम्मीद है कि स्पीकर पार्टी की निष्ठा से ऊपर उठकर कानून के लिए काम करेंगी. हाल ही में जब सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को अवमानना के मामले में दोषी ठहराया था, तब उन्हें अयोग्य करार नहीं दिया था.

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