गैस कांड की 27वीं बरसी पर रेल रोकने हुआ था उपद्रव

भोपाल,22 दिसंबर. नभासं. जमायते ए उलमा हिंद के उपाध्यक्ष एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना मुफ्ती अब्दुल रमीज खान ने आज राज्य सरकार से भोपाल गैसकांड की 27 वीं बरसी पर तीन दिसंबर को यहां रेल रोको आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में प्रदर्शकारी गैस पीडितों पर लगाए गए झूठे प्रकरणों को वापस लेने की मांग की है.

मुफ्ती रमीज खान ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 1984 के गैसकांड के पीडितों पर यदि झूठे आरोपों को वापस नही लिया गया तो शीघ्र ही जेल भरो आंदोलन प्रारंभ किया जायेगा. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के दौरान महिलाओं सहित अन्य गैस पीडितों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया जा रहा था लेकिन इन पर लाठीचार्ज कर हमला करना दुखद है. मुफ्ती के साथ मौजूद गैस पीडितों के लिए काम कर रहे पांच संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि रेल रोको आंदोलन के दौरान गैस पीडितों पर हमला करने के लिए पुलिस जिम्मेदार है और इसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाना चाहिए.उन्होंने कहा कि पुलिस ने रेल रोको आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो हजार गैस पीडितों पर दर्ज किए गए आपराधिक प्रकरणों को सरकार को वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में जिन 14 लोगों को गिरफ्तार कर कातिलाना हमला करने सहित सहित अन्य लगाए गए हैं वे सभी आरोप झूठे है. गैस पीडितं संगठन भोपाल ग्रुप फॉर इन्फ्रामेंशन एंड एक्शन के पदाधिकारी सतीनाथ षडंगी ने दावा किया कि इस हिंसा की घटना के मौजूद फोटोग्राफ और वीडियों यह साबित करते है कि यह घटना निहत्थी गैस पीडित महिलाओं पर कलेक्टर के आदेश पर पुलिस के हमले के कारण हुई है.उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने आश्वासन से पीछे हटने की निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया था,लेकिन पुलिस ने निर्दोष लोगों के खिलाफ बगैर प्रमाण के प्रकरण दर्ज किए है.

उन्होंने कहा कि जिन 14 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है उनके खिलाफ कभी भी कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नही हुआ है और इनमें छह व्यक्ति ऐसे है जो घटना के समय वहां मौजूद नही थे.उन्होंने इस घटना के संबंध में राज्य मानव अधिकार आयोग द्वारा जिला प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नोटिस जारी करने की प्रशंसा की है. उन्होंने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार लोगों के कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में इस आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है. षडंगी ने आरोप लगाया कि गैसकांड से हुई मौतों के आंकडे सुधारने और सभी गैस पीडितो को अधिकतम मुआवजा दिलवाने की मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी लेकिन राज्य सरकार ने गैसकांड से हुई मौतों और बीमारियों के आंकडे सुधारने के लिए उच्चतम न्यायालय में लंबित सुधार याचिका में जोडने के लिए कोई कदम नही उठाये है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब मुआवजे के दावेदारों में 20 गैस प्रभावित वार्डो के निवासियों को शामिल करने की मांग कर गैस पीडितो के हितों को नुकसान पहुंचा रहे है.

Related Posts: