भोपाल,26 मई,राज्य शासन ने प्रदेश के मछुआरों की बेहतरी के लिये मछुआ कल्याण बोर्ड का गठन किया है. बोर्ड के कामकाज के लिये सचिव, तकनीकी अधिकारी के साथ-साथ 23 पदों की मंजूरी भी दी गई है.

मछुआ कल्याण बोर्ड की कार्य अवधि तीन वर्ष की नियत की गई है. बोर्ड का स्वतंत्र कार्यालय भोपाल में रहेगा. बोर्ड अपनी बैठक प्रदेश में किसी भी स्थान पर करने के लिए स्वतंत्र होगा. बोर्ड में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं 5 अशासकीय सदस्य नामांकित होंगे जो मछुआ समुदाय से होंगे. बोर्ड में प्रमुख सचिव वित्त, सामान्य प्रशासन विभाग, मछली पालन विभाग सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे. संचालक मत्स्योद्योग, बोर्ड के सदस्य सचिव होंगे. मछुआरों के समग्र योजना के लिए मछुआ कल्याण बोर्ड समय-समय पर विषय-विशेषज्ञों को आमंत्रित कर सकेगा. बोर्ड पंरपरागत मछुआरों को मत्स्य-पालन में प्राथमिकता सुनिश्चित के लिए सुझाव देगा.

बंद ऋतु में मछली मारने के प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेगा. बोर्ड प्रदेश में सिंघाड़ा अनुसंधान, उत्पादन तथा विपणन के विकास, कमल गट्टा तथा उससे उत्पादित मखाना के बेहतर विपणन के लिए सुझाव देगा. बोर्ड प्रदेश की नदियों के किनारे रेत पर तरबूज-खरबूज उत्पादन में मछुआरों को प्राथमिकता देने की नीति, सुखान मछली के आखेट तथा विपणन की नीति पर सुझाव, अक्रियाशील मछुआरों की पहचान करने एवं इन्हें क्रियाशील करने, नौका एवं तैराकी में बच्चों को प्रशिक्षण, नौका घाटों पर नौका संचालन के साथ-साथ मछुआरों के समाजिक, आर्थिक तथा शैक्षणिक उत्थान के अलावा इनके समग्र विकास के संबंध में सुझाव देगा.

विगत 6-7 वर्षों के लगातार संघर्ष के चलते म.प्र. शासन ने मछली पालन नीति में परिवर्तन करते हुये 23 जनवरी-12 को महेश्वर बांध का जलाशय महेश्वर बांध प्रभावित मत्स्योद्योग सह. संस्था मर्या. मंडलेश्वर को मत्स्यपालन, मत्स्याखेट एवं विपणन के लिये स्वतंत्र रूप से दे दिया है.म.प्र. शासन द्वारा महेश्वर बांध से निर्मित होने वाले जलाशय में मछली पकडऩे का अधिकार स्वतंत्र रूप से देने एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 154 मीटर जल भराव की अनुमति परियोजनाकर्ता को देने के इस निर्णय से संपूर्ण मछुआरा समाज में हर्ष व्याप्त है.

मछुआरा संघ एवं संस्था पर्यावरण मंत्रालय के इस आदेश का स्वागत करता है एवं परियोजनाकर्ता एवं शासन से मांग करता है कि बचे हुये गांवों का तत्काल पुनर्वास कर बांध का जलाशय निर्मित किया जाये ताकि मछुआरा समाज के लोग पुन: अपने पैतृक व्यवसाय से जुड़ कर अपना जीवनयापन कर सकें.

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