गर्मी के अभी लगभग दो माह बाकी

भोपाल,4 मई,नभासं. राज्य की राजधानी भोपाल झीलों के शहर के नाम से मशहूर है. मगर शहर की दूसरी तस्वीर यह है कि यहां पेयजल का भीषण संकट है.

हर साल पेयजल संकट से शहरवासियों को निजात दिलाने करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं. बड़ी-बड़ी योजनाएं बनती हैं. थोड़ा-बहुत काम के बाद वाहवाही खूब लूटी जाती है. परंतु करोड़ों रुपए का खर्च, तमाम योजनाएं और वादे शहरवासियों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं. नतीजा ‘ढांक के वहीं तीन पांत’. हर साल गर्मियों में शहर की एक तिहाई आबादी को पेयजल के लिए गंभीर परिस्थितयों का सामना करना पड़ रहा है. पेयजल को लेकर बीते सालों में लड़ाई-झगड़े और खूनी फसाद तक राजधानी में हो चुके हैं. गुरुवार को नगर निगम के पेयजल का टैंकर जब हबीबगंज नाका स्थित डीआरएम ऑफिस व अन्य स्थानों के पास पहुंचा तो कुछ इस तरह के हालात नजर आए. जो अबतक महानगरों में देखने को मिलते थे. अभी तो गर्मी की विदाई में करीब दो महीने बाकी है. आगे हालात क्या होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

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