सोने की ऊंची कीमतों के चलते उपभोक्ताओं का रुझान अन्य प्रतिस्पर्धी लग्जरी उत्पादों की तरफ बढऩे की चिंताओं के कारण आभूषण निर्माता सोने में निवेशकों की रुचि बनाए रखने के लिए कम वजन वाले निवेश उत्पाद ला रहे हैं.

सिद्धि बुलियन लिमिटेड  ने पहली बार 100 मिलीग्राम (एक ग्राम का 10वां हिस्सा) के सोने के पेटल या फॉयल पेश किए हैं। फिलहाल कंपनी थोक खरीदारी करने वाली कंपनियों को ऑर्डर के आधार पर गोल्ड फॉइल की आपूर्ति करती है। हालांकि व्यक्तिगत ग्राहकों को भी न्यूनतम 100 फॉयलों का ऑर्डर करने पर यह उपलब्ध करा दिए जाते हैं। आरएसबीएल ने इस वर्ष के अंत तक खुदरा ग्राहकों को मुहैया कराने की योजना बनाई है।

आरएसबीएल के प्रमुख (बिक्री) समीर शाह ने कहा कि टेंपर ग्रुफ पैकिंग में प्रत्येक फॉइल प्रमाणपत्र सहित दिया जाता है। ग्राहकों को अन्य उत्पादों की तरहत वापसी की सुविधा भी देते हैं, जिस पर बाजार मूल्य से ज्यादा कीमत देते हैं। दिसंबर तक निवेशक खुले बाजार में इन्हें उस समय की बाजार कीमत और 50 रुपये अन्य शुल्कों का भुगतान कर खरीद सकेंगे।

इसका मतलब है कि ग्राहक गोल्ड पेटल का एक पीस छोटे से निवेश मात्र 325 रुपये में खरीद सकेंगे। ज्यादा ग्राम वाली ज्वैलरी, सिक्के या बार में इसे बदलवाने के लिए ग्राहक एक अवधि तक इसका संग्रह कर सकते हैं। लेकिन ग्राहकों को पेटल के लिए 50 रुपये प्रति पेटल का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। न्यूनतम एक ग्राम का गोल्ड पेटल फिलहाल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में उपलब्ध है, लेकिन वहां ग्राहक फिजिकल डिलिवरी के लिए नहीं जा सकते।

अशोक मीनावाला के मुताबिक, ज्वैलर 300-400 मिलीग्राम की गोल्ड बार पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ये सभी उत्पाद गारंटी और विश्वास के साथ उपलब्ध हैं और इनकी बिक्री पिछले एक-दो साल में बढ़ी है। विशेष रूप से छोटी बचत वाले ग्राहकों ने धीरे-धीरे कम मूल्य वाले सोने के जरिए इसका संग्रह बढ़ाने पर ध्यान देने लगे हैं। हालांकि देश में सोने की मांग पिछले दो सालों से बढ़ रही है और 2011 में इसके 1000 टन का आंकड़ा पार करने की संभावना है।

विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के मुताबिक पिछले साल भारत में सोने की मांग 763 टन रही थी। एक टे्रडिंग हाउस के विश्लेषक ने बताया कि छोटे ग्राहकों का अन्य प्रतिस्पर्धी वस्तुओं जैसे चांदी के सिक्के, चमड़े के बैग, मोबाइल और अन्य शानो-शौकत की वस्तुओं की तरफ रुझान बढ़ा है। गोल्ड पेटल जैसे कम मूल्य वाले सोने के अंश बाजार में आने से इस बदलाव को रोका जा सकेगा।

डब्ल्यूजीसी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आभूषणों की खपत में 17 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। यह इस दौरान 139.8 टन रही है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 119.4 टन थी। इसी सोने में निवेश मांग 78 फीसदी बढ़कर 108.5 टन रही है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 61 टन थी।

सोने की कीमतें पिछले एक साल में (एक सितंबर तक) रुपये मूल्य की दृष्टि से 44.25 फीसदी बढ़कर 27,610 रुपये प्रति 10 ग्राम और डॉलर मूल्य में 47 फीसदी बढ़कर 1,826.15 डॉलर प्रति औंस हो गई है।

कोलकाता स्थित श्री गणेश ज्वैलरी हाउस ने भी छोटे ग्राहकों को सोने की तरफ आकर्षित करने के लिए अपनी प्रबंधन रणनीति में बदलाव किया है। इससे पहले कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने निर्णय किया था कि 2000 रुपये कम कीमत का कोई उत्पाद नहीं उतारा जाएगा। लेकिन सोने की ऊंची कीमतों को देखते हुए कंपनी ने ज्यादा बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा करने के लिए 500 मिलीग्राम के सोने के सिक्के पेश किए हैं।

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