शहरी गरीबों के लिए 60 हजार मकानों के निर्माण का रास्ता साफ

  • मंत्रि-परिषद के निर्णय

भोपाल, 28 दिसंबर. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रि-परिषद की बैठक में एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम तथा बेसिक सर्विसेज फार अर्बन पूअर के अन्तर्गत 387 करोड़ 40 लाख रुपये की शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया.

इसके साथ ही अब शहरी गरीबों के लिये 60 हजार आवासों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय नवीनीकरण मिशन के अन्तर्गत एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम तथा बेसिक सर्विसेज फार अर्बन पूअर में मध्यप्रदेश में शहरी गरीबों के लिए 60 हजार आवासीय इकाइयां निर्मित की जा रही हैं. इनके मूल्य में हुई वृद्धि की प्रतिपूर्ति न होने के कारण इन मकानों का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा था. इस बाधा को दूर करने के लिये गरीबों के हित में मंत्रि-परिषद ने नगरीय निकायों को हुडको से लिये जा रहे ऋण के विरुद्ध यह प्रत्याभूति उपलब्ध करवाने का फैसला लिया. उल्लेखनीय है कि इन आवासों के लिये मध्यप्रदेश शासन द्वारा भूमि नि:शुल्क आवंटित की गई है. केन्द्र शासन द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को शहरी गरीबों के लिये उत्कृष्ट कार्य करने के फलस्वरूप पिछले वर्ष पारितोषिक भी प्रदान किया गया.

इन्दौर में जमीन:-  मंत्रि-परिषद ने इन्दौर की सुपर कारिडोर में स्थित जमीन में से 100-100 एकड़ जमीन इन्फोसिस और टीसीएस को आवंटित करने के लिये सूचना प्रौद्योगिक विभाग को प्रदान करने की सैद्धांतिक सहमति दी. यह जमीन 20 लाख प्रति एकड़ की दर से आवंटित की जाएगी. सूचना प्रौद्योगिकी नीति के तहत इन दोनों कम्पनियों को रियायती दर पर भूमि आवंटन के कारण इन्दौर विकास प्राधिकरण को होने वाली क्षति की भरपाई राज्य शासन द्वारा की जाएगी. क्षति का मूल्यांकन राज्य सरकार करेगी. इन दोनों कम्पनियों को यह जमीन इस शर्त पर दी जाएगी कि वे प्रति एकड़ 100 इंजीनियरों को अनिवार्य रूप से रोजगार उपलब्ध करवायेंगी. ये कम्पनियां 50 प्रतिशत रोजगार मध्यप्रदेश के स्थानीय निवासियों को देंगी. कम्पनियों द्वारा इन भूमियों पर स्पेशल इकानॉमिक जोन बनाया जायेगा जिसमें साफ्टवेयर निर्यात तथा आई.टी. इनेबल्ड सेवाओं से संबंधित न्यूनतम 10 हजार इंजीनियर प्रति कम्पनी लगाये जायेंगे. इसके अतिरिक्त सहायक रोजगार भी निर्मित होंगे.

किसानों को मुआवजा:-  मंत्रि-परिषद ने छिन्दवाड़ा जिले की पेंच डायवर्जन परियोजना के तहत किसानों को वर्ष 2011-12 की कलेक्टर गाइड लाइन और उस पर 30 प्रतिशत धनराशि के हिसाब से मुआवजा देने का निर्णय लिया. जिन किसानों की भूमि का अर्जन पूर्व में किया गया है अथवा प्रक्रियाधीन है उन सभी को इसका लाभ मिलेगा. इससे डूब क्षेत्र के लिये 198 करोड़ रूपये का जो प्रावधान रखा गया था वह बढ़कर 301 करोड़ रुपये का हो गया है. इससे डूब क्षेत्र के 30 गांव के किसानों को लाभ मिलेगा, जिनकी रोटी-रोजी प्रभावित हुई है.

अन्य निर्णय:- मंत्रि-परिषद ने सहकारिता विभाग के अन्तर्गत मध्यप्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक मर्यादित भोपाल की नाबार्ड की देनदारियों के संबंध में 185 करोड़ 5 लाख रुपये के भुगतान निर्णय लिया गया. मंत्रि-परिषद ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिये अर्हकारी सेवा में दो वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया. इससे योजनाओं के समन्वय, परीक्षण आदि के कार्य सुचारू रूप से हो सकेंगे और समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य होगा. इन पदों के रिक्त होने के कारण नगरीय निकायों में चल रही वृहद परियोजनाओं का पर्यवेक्षण, समन्वय तथा ई.डब्ल्यू.ओ. और लोकायुक्त संगठनों के प्रतिवेदनों पर परीक्षण संबंधी कार्रवाई मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी के न होने के कारण प्रभावित हो रही थीं. मंत्रि-परिषद ने जिला पंचायतों में डीआरडीए प्रशासन योजना के अन्तर्गत स्वीकृत पदों में से 50 प्रतिशत संविदा पदों की अवधि पुन: पांच वर्ष बढ़ाने का निर्णय लिया. मंत्रि-परिषद ने प्रशासनिक सेवा के तत्कालीन अपर कलेक्टर, राजगढ़ एम.एम. शर्मा की 5 प्रतिशत पेंशन अस्थायी रूप से एक वर्ष की अवधि के लिये वापस लेने का निर्णय लिया. इसी प्रकार सेवानिवृत सहायक वन संरक्षक ए.गीते की 10 प्रतिशत पेंशन दो वर्ष के लिये वापिस लिये जाने का निर्णय लिया गया.

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