नई दिल्ली, 9 मई. छत्तीसगढ़ में एक जिलाधिकारी के अपहरण और फिर मुक्ति के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार देश के लिए एक केंद्रीय बंधक नीति बनाने पर विचार करेगी. लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए चिदम्बरम ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय के अधिकारियों से राज्यों के समक्ष इस मुद्दे को उठाने के लिए कहा है.

उन्होंने कहा, मैंने अधिकारियों से राज्य सरकारों के समक्ष यह मुद्दा उठाने के लिए कहा है. यद्यपि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि बनने वाली नीति कैसी होगी लेकिन मध्यस्थों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता.  छत्तीसगढ़ में भी मध्यस्थों की भूमिका रही. मध्यस्थता व समझौता वार्ता हर देश की बंधक नीति का हिस्सा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद व घुसपैठ जैसे मुद्दों से निपटना राज्य व केंद्र सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है. मैं सभी से साथ काम करने की अपील करता हूं. यदि संविधान ने राज्यों के पुलिस पर नियंत्रण दिया है तो उसी ने केंद्र को आतंकवाद पर नियंत्रित करने का दायित्व भी सौंपा है.

मृत्युदंड के कानूनों की समीक्षा की योजना नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मृत्युदंड से सम्बद्ध कानूनों की समीक्षा की कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने बड़ी संख्या में दया याचिकाओं का निपटारा किया है. राज्य सभा में  चिदम्बरम ने कहा कि मौत की सजा को लेकर अलग-अलग विचार हैं लेकिन कोई भी आयोग इसे समाप्त करने के पक्ष में नहीं है.

मृत्युदंड पर दो तरह के विचार हैं. कुछ देशों ने इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है जबकि कुछ अन्य देशों ने इसे कुछ मामलों तक सीमित किया है. भारत में जघन्य मामलों में फांसी की सजा दी जाती है. किसी भी रिपोर्ट में मृत्युदंड समाप्त करने की वकालत नहीं की गई है. वर्तमान सरकार फांसी की सजा समाप्त करने पर विचार नहीं कर रही है और न ही यह इसका समय है. मृत्युदंड से बचने के तरीके मौजूद हैं. इसके लिए राज्यपाल या राष्ट्रपति के पास विचार के लिए दया याचिका भेजी जा सकती है. बीते साढ़े तीन साल में हमने 16 दया याचिकाओं का निपटारा किया है. यह प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज हुई है.

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