चेन्नई, 24 दिसंबर. टीम अन्ना की मुंबई में तीन दिन के अनशन की तैयारी के बीच सरकार ने शनिवार को कहा कि लोकपाल विधेयक किसी के द्वारा सड़कों या मैदानों में पास नहीं किया जा सकता और वह इस मामले से सख्ती से निपटेगी.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने संवाददाताओं से कहा पांच सदस्यों की एक टीम सरकार पर एक विधेयक पारित करने के लिए दबाव नहीं डाल सकती. विधेयक को संसद में मतदान के बाद ही पारित किया जा सकता है. सिर्फ संसद ही विधेयक पारित कर सकती है. कोई भी सड़क या मैदान पर ऐसा नहीं कर सकता. वह संसद की तरफ से फैसला नहीं कर सकते. हम इससे सख्ती से निपटेंगे. नारायणसामी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब टीम अन्ना ने संसद में पेश किए गए लोकपाल विधेयक को कमजोर बताकर नामंजूर कर दिया है और इस मामले पर एक बार फिर सरकार के साथ दो दो हाथ करने पर आमादा है. अन्ना हजारे सशक्त लोकपाल के समर्थन में 27 दिसंबर को मुंबई में तीन दिन के अनशन पर बैठने वाले हैं. उनकी मांग है कि सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाया जाए और अनशन के जरिए वह सरकार पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाना चाहते हैं. इस विधेयक पर संसद के शीतकालीन अधिवेशन की विस्तारित अवधि के दौरान मंगलवार से बहस शुरू होनी है. भाजपा सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने भी विधेयक के मौजूदा स्वरूप की आलोचना की है और वह अल्पसंख्यक आरक्षण मुद्दे पर सरकार से टकराव के मूड में हैं.

चुनाव जीतकर देंगे जवाब

लोकपाल और भ्रष्टाचार पर टीम अन्ना के चौतरफा हमले की काट के लिए कांग्रेस ने भी कमर कस ली है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी को टीम अन्ना के कैंपेन को करारा जवाब देने के लिए आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा.

चुनावों में बेहतर प्रदर्शन पर बल
सोनिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अधिक से अधिक सीटें जीतकर और अन्य राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर टीम अन्ना को सही तरीके से जवाब दिया जा सकता है. कांग्रेस महासचिवों की मीटिंग में सोनिया ने साफ किया कि चुनावों में जीत ही लोगों को अन्ना हजारे के सवालों का जवाब होगा.

अन्ना की बिगड़ी तबीयत

मुंबई. मजबूत लोकपाल के लिए 27 दिसंबर से होने वाले अनशन से पहले अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ गई है. तबीयत खराब होने की वजह से अन्ना शुक्रवार को रातभर सो नहीं सके. अन्ना को खांसी और कफ की शिकायत है. अन्ना हजारे 27 दिसंबर से अनशन करने पर अड़े हुए हैं. अन्ना इस वक्त अपने गांव रालेगण सिद्धि में हैं. उनकी तबीयत बिगडऩे की खबर से अन्ना समर्थक चिंतित हैं, लेकिन डाक्टरों का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है. अन्ना के विरोधियों का कहना है कि उनको अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने शनिवार को एक बार फिर कहा कि अन्ना के साथी खुद तो बढिय़ा खाना खाते हैं और उनसे उनकी उम्र का खयाल बिना अनशन करवाते हैं.

अन्ना जिद छोड़ दें

जमशेदपुर. आम भारतीयों को हमेशा तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाने की चर्चित और सफल कानूनी मुहिम चला चुके युवा उद्योगपति तथा सांसद नवीन जिंदल ने गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे को जनलोकपाल विधेयक के मामले में जिद भरा रास्ता छोडऩे की सलाह देते हुए कहा कि केवल कानून बना कर देश से भ्रष्टाचार नहीं मिटाया जा सकता. जिंदल ने यहां सोनारी हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि जनलोकपाल को लेकर अन्ना का जिद पर अडऩा गलत है. उन्हें भूख हड़ताल और जेल भरो जैसी बातों की धमकी देना छोड़ कर संसदीय नियमों को अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सीबीआई की स्वतंत्रता बनाए रखना भी जरूरी है. उन्होंने जनलोकपाल विधेयक के नाम पर चुटकी लेते हुए कहा कि जन और लोक दोनो शब्दों का एक ही अर्थ जनता है, इसलिए यह नाम ठीक नहीं है.

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