भोपाल, 8 अप्रैल, नभासं. राजधानी समेत प्रमुख व्यस्ततम मार्गों पर पेंट कर विज्ञापन दर्शाने वाली अवैध गुमठियां अवैध कब्जे और कारोबार को प्रोत्साहित कर रही हैं. इनसे जहां बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं होती हैं वहीं सार्वजनिक एवं व्यवसायिक क्षेत्रों में अतिक्रमण को भी बढ़ावा मिल रहा है.

राजधानी के प्रमुख सार्वजनिक एवं व्यवसायिक क्षेत्रों में अतिक्रमण ने पैर पसार रखे हैं. प्रमुख चौराहों एवं मार्गों पर अवैध रूप से गुमठियां लगा लेना आम बात हो चली है. राजधानी के अलावा प्रमुख राष्टï्रीय राजमार्गों पर अवैध गुमठियों पर पेंट किये गये विज्ञापन दुर्घटनाओं, अवैध धंधों के अलावा अतिक्रमण को प्रोत्साहित करती हैं. राजधानी के प्रमुख स्थानों पर जहां वोडाफोन जैसी बड़ी कम्पनियों के विज्ञापन गुमठियों में चारों ओर दिखाई देते हैं तो भोपाल-इन्दौर राष्टï्रीय मार्ग के दोनों ओर कई बड़ी कम्पनियों ने अपने विज्ञापन गुमठियों के चारों ओर दीवारों पर लगा रखे हैं. इसके लिये कम्पनियां गुमठी वालों को राशि का भुगतान करती हैं, जिससे दूसरे गुमठी वाले भी अपनी गुमठियां सार्वजनिक स्थानों पर बिना किसी अनुमति के लगा लेते हैं क्योंकि उन्हें भी अपनी गुमठियों पर विज्ञापन लगाये जाने के एवज में कम्पनियां रुपये देती हैं.

अवैध गुमठियों एवं बढ़ते अतिक्रमण के कारण राजधानी का विकास जहां अरुवद्ध  हो रहा है वहीं अवैध गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है. यहां से कई तरह की गतिविधियां संचालित होती हैं. राजभोज सामाजिक एवं पर्यावरण सुधार संगठन के अध्यक्ष सुनील वर्मा का कहना है कि सार्वजनिक एवं व्यस्ततम व्यवसायिक क्षेत्रों में अतिक्रमण नहीं होने देने चाहिये. जहां गुमठियां रखी जाती हैं उनकी जांच-पड़ताल की जानी चाहिये. इन गुमठियों में विज्ञापन लगाये जाने पर रोक लगाई जानी चाहिये ताकि अतिक्रमण को प्रोत्साहन नहीं दिया जा सके और सार्वजनिक स्थानों पर इन अवैध गुमठियों के कारण दुर्घटनायें नहीं हों. वर्मा ने बताया कि राजधानी के प्रमुख नागरिकों का एक प्रतिनिधि मंडल इस संबंध में शीघ्र ही मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपेगा.आयुष्मति महिला चेतना मंच की सचिव श्रीमती रानु ठाकुर ने राजधानी को अतिक्रमण मुक्त बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि गुमठियों पर विज्ञापन लगाकर पैसा कमाने की प्रवृत्ति ने अतिक्रमण को बढ़ावा दिया है, जिसे रोकने के लिये कोई कारगर नीति राज्य सरकार और नगर निगम को बनाना चाहिये.उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के जहां अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है वहीं पर्यावरण और सामाजिक वातावरण भी बिगड़ता है.

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