लोगों को नि:शुल्क चिकित्सकीय परामर्श

भोपाल, 18 दिसंबर. अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेले में अभी तक 52 लाख रूपये से अधिक की जड़ी-बूटियाँ एवं लघु वनोपज से उत्पादित वस्तुओं का विक्रय हुआ है. आयुर्वेद और वन औषधियों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों से अभी तक 1600 से अधिक रोगियों का नि:शुल्क परीक्षण कर चिकित्सकीय परामर्श दिया.

भोपाल नगर के बिट्टन मार्केट स्थित दशहरा मैदान में हर्बल मेला नगरवासियों तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिये पहले दिन से ही आकर्षण का मुख्य केन्द्र बना हुआ है. मेला में आये लोगों ने आँवला से बने विभिन्न उत्पाद, शहद के साथ ही तुलसी सीरप,एलोवेरा, बेल शर्बत आदि को बेहद पसंद किया और इसकी खरीदी की. विंध्य हर्बल के 300 से अधिक उत्पाद मेले में रखे गये हैं. प्रदेश के वनांचलों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों से निर्मित इन औषधियों का सामान्य से जटिल रोगों के ईलाज में उपयोग किया जाता है. मेले के कई स्टालों पर नाड़ी वैद्य अपनी सेवाएँ देकर आम लोगों को रोगों से सचेत कर रहे हैं. मेले में आयुर्वेदिक चाय तथा हर्बल टॉफी पर लोगों की भीड़ बनी रहती है. लोगों की बाँस तथा काष्ठ फर्नीचर तथा विभिन्न क्षेत्रों के परम्परागत व्यंजनों में रूचि बनी हुई है. मेले में नेपाल के स्टॉल पर वहाँ की परम्परागत वन औषधियों के साथ ही सुगंधित तेल उपलब्ध है. हर्बल मेले में प्रतिदिन लग रहे नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में 75 चिकित्सकों ने उदर रोग, त्वचा रोग, मिर्गी, वाणी दोष,ल्यूकेमिया, जोड़ों के दर्द आदि रोगों के उपचार की विधियाँ बताई.

नगर के 18 महाविद्यालयों के 22 छात्र-छात्राओं ने वन, पर्यावरण एवं जैव विविधता विषय पर तात्कालीन भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया. मेला प्रांगण में 3 शालाओं के 30 बच्चों ने लघु नाटिका की आकर्षक प्रस्तुति दी . इसी प्रकार श्रीमती पद्मजा विश्वरूप के वीणावादन को सभी ने सराहा. रविन्द्र माथुर के दल द्वारा वनों के महत्व पर रंगारंग प्रस्तुति दी गई. वहीं हिपअप नृत्य तथा नृत्य नाटिका का मंचन भी हुआ. मेला प्रांगण में चौथे दिन खुला मंच का आयोजन रखा गया है. मुकेश तिवारी के गीत, गजल के अतिरिक्त सुहासिनी जोशी के दल द्वारा आर्केस्ट्रा की प्रस्तुति दी जायेगी.

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