घरेलू अर्थ व्यवस्था में मंदी की सुगबुगाहट

मुंबई, 13 दिसंबर. भारतीय रुपए के मूल्य में मंगलवार को भी गिरावट जारी रही. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया नई रिकॉर्ड गिरावट पर पहुंच गया है.

मंगलवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 53.21 डॉलर के पार चला गया है. डॉलर के मुकाबले पहली बार रुपए ने 53 का स्तर पार किया है. इसके साथ ही घरेलू अर्थव्यवस्था में मंदी आने का डर पैदा हो गया है. इसके अलावा यूरोजोन क्षेत्र के कर्ज संकट पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. सोमवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे की भारी गिरावट के साथ 52.84 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था. औद्योगिक उत्पादन पर जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में रुपए में 5.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि रुपए को स्थिर करने के लिए रिजर्व बैंक की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं हैं. ऐसे में रुपया जल्द ही 54 रुपए के स्तर तक पहुंच सकता है.

पेट्रो कीमतों पर बढ़ेगा दबाव
रुपए में भारी गिरावट का दबाव पेट्रो कीमतों पर पड़ सकता है. चूंकि देश की पेट्रोलियम कंपनियां जरूरत का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करती हैं. डॉलर के मुकाबले रुपए के महंगे होने से कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाएगा. जिस कारण कंपनियों पर पेट्रो कीमतों में बढ़ोतरी करने का दबाव बढ़ जाएगा. ऐसे में ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद घरेलू तेल कंपनियां पेट्रो उत्पादों के दाम घटा नहीं पाएंगी.

कॉरपोरेट की चिंता
रुपए में गिरावट कॉरपोरेट जगत की सबसे बड़ी चिंता है. चूंकि आयातित कच्चे माल की लागत बढऩे से उनका लाभ कम हो जाएगा. यदि इसकी भरपाई करने के लिए वह कीमतों में बढ़ोतरी करते हैं तो मांग में कमी की आशंका खड़ी हो जाती है. यही वजह है कि कॉरपोरेट रुपए को संभालने के लिए रिजर्व बैंक से लगातार दखल देने की मांग कर रहे हैं.

‘आर्थिक संकट से निपटने की क्षमता’

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने औद्योगिक विकास दर में गिरावट पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस दर में इतनी गिरावट काफी गंभीर है. लेकिन देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और भारत के पास आर्थिक संकट से निपटने की क्षमता है. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए हमें मिलकर उपाय ढूंढने होंगे. संसद के शीत सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है और सरकार में नीतियों का अभाव है.  बेरोजगारी दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है. रुपया कमजोर हो रहा है और आर्थिक विकास दर गिर रही है. हम भी इसके प्रभाव में आ सकते हैं और हमें इसकी चिंता है. स्थिति में सुधार के लिए छोटे-मंझोल उद्योगों को रियायत मिला और बुनकरों को पैकेज देने का फैसला किया गया. आर्थिक क्षेत्रों में आई शिथिलता पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार सुधारों के मामले में व्यापक सहमति बनाने के लिए प्रयास करेगी क्योंकि समस्याओं से पार पाने में अर्थव्यवस्था सक्षम है. प्रणब ने राज्यसभा में 2011-12 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर हुई चर्चा के जवाब में यह बात कही. उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास दर के नकारात्मक रहने के मद्देनजर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या विकास मंद पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस संकट को पार पाने के लिए हमारे पास क्षमता और मजबूती दोनों है.

Related Posts: