पीएफआई के सर्वे वर्क में हुआ खुलासा

भोपाल, 28 मई, नभासं. खसरे जैसी संक्रामक बीमारियों का बचाव होम्योपैथिक औषधियों से किया जा सकता है. प्रतिष्ठ फाउंडेशन द्वारा वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में एक सर्वे वर्क किया गया है, जिसमें उभर कर यह बात सामने आई है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक फाउंडेशन के सदस्यों द्वारा कुल 677 परिवारों के 2367 सदस्यों पर होम्योपैथिक औषधियों का विश्लेषण किया गया. इनमें से 25.99 फीसदी लोगों में विशेषकर खसरे से बचाव हेतु होम्योपैथिक औषधियों का प्रयोग किया गया जिनमें 23.33 प्रतिशत लोगों ने संतोष जाहिर किया, जो कि होम्योपैथिक औषधियों के प्रभाविकता का सबसे बड़ा प्रमाण है.
फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. ओपेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा आयोजित किये गये नि:शुल्क प्रतिरक्षक शिविरों के आंकड़ों को अगर शामिल किया जाये तो यह प्रतिशत और बढ़ सकता है. अध्ययन में यह भी सामने आया है कि हेम्योपैथी के बारे में 75.28 प्रतिशत लोग जानते तो हैं, फिर भी जागरूकता व उपलब्धता के अभाव में केवल 2.95 प्रतिशत लोग ही होम्योपैथिक चिकित्सालयों में जा पाते हैं. जबकि 19.49 प्रतिशत लोग होम्योपैथी से इलाज कराने में विश्वास रखते हैं. कुछ और क्षेत्रों के आंकड़े मिलने अभी शेष हैं, जिन्हें शामिल किये जान पर यह प्रतिशत और बढऩे की संभावना है.

गौरतलब है कि इसके पहले भी संस्था द्वारा सरकार से आग्रह किया गया था कि कुछ संक्रामक बीमारियां जैसे स्वाईन फ्लू, चिकन पाक्स, मस्तिष्क ज्वर आदि में यदि होम्योपैथिक औषधियों को प्रतिरक्षक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है तो ऐसी घातक बीमारियों से बचाव काफी हद तक संभव है. फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. त्रिपाठी के नेतृत्व में हमसाई प्रवक्ता डॉ. दीपक ङ्क्षसह द्वारा इसको लेकर सरकार के प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला. प्रतिष्ठï फाउंडेशन द्वारा किये गये इस सर्वे वर्क में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आये हैं. तकरीबन 75 फीसदी लोग जहां एलोपैथिक उपचार को प्राथमिकता देते हैं, वहीं 20 फीसदी लोग अब होम्योपैथिक उपचार को ज्यादा सर्वोपरि मान रहे हैं. हैरानी की बात तो यह है कि आयुर्वेदिक उपचार को प्राथमिकता देने वाले मात्र 3 फीसदी लोग ही सामने आये हैं.

मैं आपको बता देना चाहता हूं कि उक्त सर्वेक्षण राजधानी भोपाल के शहरी एवं ग्रामीण क्षत्रों में किया गया है, जिसका मार्गदर्शन डॉ. आयशा अली (रजिस्ट्रार), डॉ. मो. जकारिया (सीसीएच सदस्य), डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. सुशीला, डॉ. चेतन शुक्ला, डॉ. भारती, डॉ. शैलेष ने किया है. उक्त सर्वेक्षण कार्य में डॉ. दीपक ङ्क्षसह (प्रवक्ता), सुनील ङ्क्षसह सहित तमाम चिकित्सकों एवं छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

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