शहर के अधिकतर अस्पतालों में नहीं आग बचाव के उपाय

भोपाल,12 दिसंबर.नभासं. कोलकाता के  एएमआरआई अस्पताल में हुए अग्रिकांड के बाद राजधानी के अस्पतालों की बात की जाए, तो यहां भी अधिकतर अस्पतालों में आग बचाओ के पर्याप्त इंतजाम न होने के परिणाम सामने आए हैं.

इन अस्पतालों में एस्टिंग्विशर्स नहीं हैं. वहीं निजी, सरकारी और गैस राहत के जिन अस्पतालों में एस्टिंग्विशर्स लगे हैं, वे चालू हैं या नहीं, इस तरफ अस्पताल प्रबंधन का शायद ही ध्यान गया हो. किस अस्पताल में क्या कमीं- शहर के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल में आग से बचाव के बारे में सवाल खड़े होने लगे हैं.  अस्पताल में आग से बचाव के लिए कोई पर्याप्त उपाय नहीं है. यहां न तो सेंट्रल फायर सिस्टम है और न ही फायर एक्सटींगीशर लगे हैं. वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हमने फायर ब्रिगेड और नगर निगम को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह अस्पताल का निरीक्षण कर बताएं कि आग से बचने के क्या उपाय किए जा सकते हैं. इसके बाद हम प्रस्ताव बनाकर फायर सिस्टम डेवलप करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे. कमला नेहरू अस्पताल में सेंट्रल फायर सिस्टम की व्यवस्था है जिसका रख-रखाव सीपीए द्वारा किया जाता है.

लेकिन इसे आज के दौर के हिसाब से अब तक अपग्रेड नहीं किया गया है. वहीं जेपी अस्पताल में सेंट्रल फायर सिस्टम नहीं है जिससे यहां आग का खतरा रहता है. बहुमंजिला इमारत होने से कमला नेहरू अस्पताल को आग से बचाव के इंतजामों को और दूरूस्त करने की जरूरत है. सुल्तानिया अस्पताल में भी जरूरत के मुकाबले फायर उपकरणों की संख्या कम है. जवाहर लाल नेहरू व इंदिरा गांधी अस्पताल में भी आग से बचाव के उपायों में कमी है. साथ ही कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में न तो फायर उपकरण है और न ही रेत से भरी बाल्टिओं की व्यवस्था है. अस्पतालों में कमियों को देखते हुए सीएमएचओ कार्यालय की ओर से सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को आग से बचाव के इंतजाम करने, फायर इक्विपमेंट लगाने और अज्ञात स्थिति में अस्पताल से निकलने के रास्ते प्रदर्शित करने के लिए मौखिक निर्देश दिए गए हैं. कुछ अस्पतालों को मेल भी भेजे गए हैं. सोमवार को सभी अस्पतालों को लिखित में आदेश दे दिए जाएंगे.

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