बिचोलियों की पौ-बारह

नई दिल्ली, 21 अगस्त. सूखे के बाद कई राज्यों से आई बाढ़ की खबरों ने महंगाई की आग में घी का काम किया है. खुले बाजार में सब्जियों से लेकर आटा, दाल, खाद्य तेल और चावल सहित रोजमर्रा के उपयोग की अन्य खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से ऊपर चढ़ रहे हैं.

सरकार ने भी माना है कि सप्ताह भर में थोक कीमतें जहां 5 फीसदी तक बढ़ी हैं, वहीं खुदरा कीमतों में 39 फीसदी तक का इजाफा हुआ है. यही नहीं, उत्पादक क्षेत्रों के भावों के मुकाबले खपत वाले क्षेत्रों की मंडियों में खुदरा कीमतों का अंतर चार गुना तक बढ़ गया है. खास बात यह है कि बढ़ी हुई कीमतों से एक ओर जहां आम आदमी का बजट बिगड़ा है, वहीं दूसरी ओर इन कीमतों का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है, बल्कि इसका फायदा बिचौलियों के साथ ही थोक व खुदरा कारोबारी उठा रहे हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार सप्ताह भर के दौरान थोक कीमतों में तीन से पांच फीसदी, जबकि खुदरा कीमतों में 15 से 39 फीसदी तक की वृद्धि हुई है. खुदरा कीमतों में हो रही बढ़ोतरी की वजह बिचौलियों की बढ़ती सक्रियता है.

न सिर्फ सब्जियां बल्कि खाद्य तेल, दाल और चावल के थोक व खुदरा मूल्य में भी अंतर बढ़ता जा रहा है. थोक कारोबारियों का आरोप है कि ग्रासरी वस्तुओं में तेजी की वजह कमोडिटी एक्सचेंजों में ऊंची होती वायदा कीमतें हैं. इसका असर हाजिर बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है. वहीं, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रो. केवी थॉमस का कहना है कि हाजिर व वायदा की कीमतों पर सरकार बराबर नजर रख रही है. वायदा कीमतों पर लगाम लगाने के लिए वायदा व्यापार आयोग ने कई सख्त कदम उठाए हैं. इसके बावजूद अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सरकार कई वस्तुओं के वायदा कारोबार को स्थगित भी कर सकती है.

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