भोपाल. देश में कमजोर मानसून, कमजोर वितरण प्रणाली के चलते दालों की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आ सकता है। देश के अग्रणी औद्योगिक संस्थान एसोचैम ने दालों पर तैयार अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। उसने सोमवार को एक प्रेसवार्ता में अपनी यह रिपोर्ट जारी की।

औद्योगिक संस्था के अनुसार अवर्षा की स्थिति का सबसे अधिक असर चने की फसल पर पडऩे वाला है। जबकि जून 2011 से लेकर मई 2012 तक इसके दामों में 90 फीसदी की तेजी आ चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार कीमतों में आ रही तेजी का सीधा मुनाफा किसान की जगह बिचौलियों की जेब में जा रहा है। हम अपनी दालों से जुड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर हैं। लेकिन वे देश जहां से यह दाल आती है सूखे की चपेट में है इसके चलते वहां से आयातित दाल की मात्रा में गिरावट आ सकती है। एसोचैम ने सुझाव दिया है कि सरकार दालों में आ रही तेजी पर अंकुश लगाने के लिए कीमतों की मॉनिटरिंग करे।

जैसे ही दामों में एकदम से बढ़ोतरी हो वह हस्तक्षेप करके उस पर लगाम लगाए। साथ ही किसानों को खुद ही दालों के प्रसंस्करण के लिए प्रोत्साहित करे। इससे खलिहान स्तर पर ही मूल्य संवर्धन की व्यवस्था हो सकेगी। रावत ने कहा कि सबसे अधिक असर देसी चने की दाल पर पडऩे के आसार हैं। उन्होंने कहा कि जून 2011 से मई 2012 के एक साल के दौरान इसके दाम में 90 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है और अनुमान है कि दीपावली तक चने की दाल की कीमतें अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच जायेंगी, क्योंकि देशी चने के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं ने दाम बढा दिए हैं।

देखने में आया है कि दालों के दाम बढने से किसानों को तो केवल 10 से 15 प्रतिशत तक ही फायदा हो पा रहा है जबकि बडा मुनाफा तो बिचौलियों के हाथों लग रहा है और वे 85 प्रतिशत तक लाभ उठा रहे हैं.

खाद्य तेल मजबूत

इंदौर. त्योहारी मांग निकलने से प्रदेश की मंडियों में फिलहाल खाद्य तेलों की कीमतों में सुधार देखा जा रहा है। हालांकि कारोबारियों का कहना है कि गत दिनों खाद्य तेलों की कीमतों में आई कमजोरी के बाद निचले स्तर पर निकली मांग से बाजार में हल्की हलचल देखी जा रही है। देश के साथ विदेशों में सोयाबीन की फसल बेहतर बताई जा रही है जिसके चलते आने वाले दिनों में खाद्य तेल के कारोबार में जोरदार तेजी की संभावना नहीं है।

मध्य प्रदेश के साथ ही देश के अन्य सोयाबीन उत्पादक रा’यों में मानसून सुधरने से सोयाबीन की फसल को काफी बेहतर स्थिति में बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि मानसून इसी प्रकार से बना रहा तो इस बार देश में सोयाबीन की पैदावार गत वर्ष के मुकाबले अधिक रहेगी। देश में अब तक 106 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। वहीं, ब्राजील में इस साल 8 करोड़ टन के रिकॉर्ड सोयाबीन उत्पादन की बात कही जा रही है। जिसके चलते आने वाले समय में सोया तेल के भावों जोरदार तेजी से इंकार किया जा रहा है। फिलहाल प्रदेश की मंडियों में सोया तेल के दाम 740 रुपये से 744 रुपये प्रति 10 किलो बोले जा रहे हैं।

जबकि जुलाई माह के मध्य में इसके भाव 735 रुपये के आसपास थे। इस प्रकार गत एक माह के दौरान त्योहारी मांग निकलने से सोया तेल के भावों में लगभग 10 रुपये प्रति 10 किलो की तेजी आ चुकी है। इसी प्रकार पाम तेल के भाव भी 665 रुपये से बढ़कर 670 रुपये प्रति 10 किलो बोले जा रहे है। बाजार जानकारों के अनुसार जुलाई माह के मध्य में 815 रुपये प्रति 10 किलो बिकने वाला सरसों तेल फिलहाल 725 रुपये पर बिक रहा है।

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