भोपाल गैस कांड के लिये डाउ जिम्मेदार नहीं : आईओसी

नई दिल्ली, 16 फरवरी. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति यानी आईओसी ने भारतीय ओलंपिक संघ की 1984 के भोपाल गैस पीडि़तों के लिये चिंता को तो माना है लेकिन साथ ही साफ किया है कि डाउ केमीकल का 2000 तक यूनियन कार्बाइड में कोई मालिकाना हक नहीं था.

आईओसी ने इसके साथ ही कहा कि उसका डाउ केमीकल के साथ पिछले 30 साल से अधिक समय से रिश्ता है और हमने जब डाउ के साथ भागीदारी पर चर्चा की तो हम भोपाल कांड से वाकिफ थे. भारतीय ओलंपिक संघ ने लंदन ओलंपिक खेलों के एक प्रायोजक के रूप में डाउ केमीकल का शुरू से विरोध किया है क्योंकि यूनियन कार्बाइड का मालिकाना हक उसके पास है. यूनियन कार्बाइड भारत के सबसे दर्दनाक औद्योगिक हादसे के लिये जिम्मेदार रही है. आईओए न आईओसी और लंदन ओलंपिक खेलों की आयोजन समिति से डाउ को खेलों के प्रायोजक से हटाने का आग्रह किया था. आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा को भेजे गये पत्र में आईओसी प्रमुख जाक रोगे ने कहा है आईओसी मानती है कि 1984 में भोपाल कांड भारत और दुनिया के लिये भयावह था. ओलंपिक आंदोलन पीडि़तों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना रखता है.

रूख स्पष्ट करे केंद्र : मल्होत्रा

मल्होत्रा ने कहा कि आईओए आईओसी के रवैये से संतुष्ट नहीं है. हम चाहते हैं कि आईओसी को हमारी भावनाओं को समझकर डाउ को प्रायोजक से हटाना चाहिए.  केंद्र सरकार को इस मसले पर अपना रवैया साफ करना चाहिए. हमें अभी सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है जबकि आईओसी ने हमें जवाब दे दिया है. जबकि डाउ केमीकल सरकार की जानकारी और अनुमति से भारत में अपना काम कर रहा है तब प्रायोजन मसला उठने पर उसने आईओए के पाले में गेंद फेंक दी. उन्होंने कहा सरकार को इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

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