अगले माह राजधानी भोपाल में विश्व का पहला अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धर्म धम्म सम्मेलन होने जा रहा है. इसी अवसर पर बौद्ध तीर्थ सांची में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बौद्ध विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया जायेगा. यह बहुत ही उपयुक्त होता कि यह सम्मेलन सांची में ही रखा जाता. इस अवसर के लिए वहां स्थायी व भव्य सभागार भी बन जाता.

बौद्धकालीन इतिहास में बौद्ध शिक्षा केंद्रों में तक्षशिला व नालंदा विश्वविद्यालयों का उल्लेख है और उनके भग्नावशेष भी पुरातत्वीय पर्यटन स्थल हो गए. तक्षशिला पाकिस्तान में चला गया और नालंदा बिहार राज्य में है. अब दोनों ही शिक्षा के केंद्र नहीं रहे. इसलिए सांची में स्थापित होने जा रहे बौद्ध विश्वविद्यालय को भारत का प्रथम बौद्ध विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त हो जायेगा. सांची में सन् 1950 के दशक में श्रीलंका ने एक बौद्ध विहार का निर्माण कराया है. इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने किया और उसकी अध्यक्षता भारत की महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष एवं भारत के मान्य राजनेता डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने की थी. श्रीलंका, म्यनमार व भूटान हमारे सबसे निकट बौद्ध राष्ट्र है. सिक्किम राज्य व लद्दाख क्षेेत्र बौद्ध प्रमुख है. हिमाचल के धर्मशाला नगर में बौद्धों के शीर्ष नेता दलाईलामा का वास है. तिब्बत पर चीनी आक्रमण व कब्जा करने से बेदखल लाखों तिब्बती शरणार्थियों को भारत में सम्मानपूर्वक रखा जा रहा है.

श्रीलंका में हमेशा से हमारे रामकालीन युग से सांस्कृतिक संबंध रहे हैं. यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि इन दिनों राजीव गांधी के हत्यारे लिट्टे संगठन का तमिल भाषा के नाम पर द्रविड़ मुनेत्र पार्टी के नेता करुणानिधि उस देश से हमारे संबंधों को बिगाडऩे की भाषायी राजनीति कर रहे हैं. लिट्टï का सफाया कर श्रीलंका ने दुनिया को दिखा दिया कि आतंक से कैसे निपटा जा सकता है.

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