अमेरिकी दबाव में होगी दोनों देशों के बीच बातचीत

इस्लामाबाद, 14 अगस्त. मुंबई पर हुए आतंकी हमलों [26/11] के बाद भारत और पाकिस्तान विश्वास बहाली के उपायों के तहत अपनी-अपनी खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों की मुलाकात के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत अमेरिका के दबाव में आयोजित की जा रही है।

दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सौहार्द्र में आई कमी को पूरा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत यह प्रस्ताव दिया गया है। सूत्रों ने दावा किया है कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग [रॉ] और इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस [आइएसआइ] के प्रमुखों की मुलाकात कराने के लिए अमेरिका दबाव डाल रहा है। एक पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित रूप से संपर्क रखने के प्रस्ताव सहित कई अन्य प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि मुलाकात की संभावित तारीख के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2014 से अफगानिस्तान से नाटो बलों की स्वदेश वापसी को देखते हुए अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अगले कुछ वर्षो के दौरान भारत और पाकिस्तान के संबंध खराब न हो। रिपोर्ट के मुताबिक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों में से कोई भी देश आधिकारिक तौर पर इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।

26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान ने अपनी खुफिया एजेंसी आइएसआइ और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के प्रमुखों की बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव दिया था। मगर भारत सरकार को इस प्रस्ताव पर कई आपत्तियां थी। मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने घोषणा की थी कि आइएसआइ प्रमुख मामले की जांच में मदद के लिए भारत जाएंगे। उसी दिन रक्षा प्रतिष्ठान से उल्टी प्रतिक्रिया मिलने पर इस फैसले को पलट दिया गया था।

अतीत को पीछे छोड़ आगे बढऩा होगा: कयानी

इस्लामाबाद, 14 अगस्त. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने कहा कि कोई भी अपने आप में पूर्ण नहीं है और हर कोई गलतियां करता है। लेकिन हमें अतीत को पीछे छोड़ कर आगे बढऩा होगा।

काकुल स्थित पाकिस्तान सैन्य अकादमी में आजादी परेड को सम्बोधित करते हुए कयानी ने आतंकवाद से लडऩे के लिए बेहतर तथा सख्त कानूनों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पूरी दुनिया ने आतंकवाद से निपटने के लिए कड़े कानूनों का निर्माण किया है। इसी शहर में पिछले साल दो मई को एकपक्षीय अमेरिकी कार्रवाई में अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया था। कयानी ने कहा, हमें अतीत को पीछे छोड़ कर आगे बढऩा होगा। सेना प्रमुख ने कहा कि कोई भी पूर्ण नहीं होता, हर कोई गलतियां करता है, कुछ कम तो कुछ ज्यादा, लेकिन हमें इससे उबरना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे देश को एकजुट होना होगा, क्योंकि सेना अकेले सफल नहीं हो सकती। कयानी ने कहा कि सेना और सरकार ने 25 अरब रुपए की आर्थिक व कल्याण परियोजना पूरी कर ली है। सेना अगले दो साल में अन्य परियोजनाओं पर भी खर्च करेगी।

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