प्रधानमंत्री पद की होड़ के सवाल को टाल गए वरिष्ठ भाजपा नेता

नागपुर, 21 सितंबर. वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि उन्हें आज तक जो कुछ मिल सकता था, उससे कहीं बहुत ज्यादा संघ परिवार, पार्टी और सह कार्यकर्ता उन्हें दे चुके हैं।

आडवाणी ने प्रधानमंत्री पद पर काबिज होने की बात को लगभग टालते हुए कहा कि मैं बस यही कह सकता हूं कि मैं पहले आरएसएस कै स्वयंसेवक बना, फिर जनसंघ का एक सदस्य और फिर भाजपा का सदस्य बना। मैं अनुभव करता हूं कि मुझे इन संगठनों से, अपने सह कार्यकर्ताओं से जो मिला है और देश ने मुझे जो कुछ दिया है वह प्रधानमंत्री के पद से बहुत ज्यादा है। उन्होंने यह बात आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को एक सवाल के जवाब में कही।

ऐसी रिपोर्टें थी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यात्रा शुरू करने की आडवाणी की योजना से आरएसएस नाराज है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस यात्रा को अगले आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा की उम्मीदवारी की पूर्व उप प्रधानमंत्री की दावेदारी के तौर पर देखा जा रहा था। आडवाणी से जब पूछा गया कि इस यात्रा के पीछे क्या यह मंशा है तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इनका आपस में कोई संबंध नहीं है। पूर्व उप प्रधानमंत्री ने दावा किया कि वह अपनी यात्रा के लिए आशीर्वाद लेने के उद्देश्य से नागपुर आए हैं। आडवाणी ने कहा कि मैंने आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत से भेंट की और उनका आशीर्वाद मांगा। उन्होंने मुझे पूरा समर्थन और आशीर्वाद दिया और यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।

पूर्व उप प्रधानमंत्री ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी मुलाकात की और उनकी सेहत की जानकारी ली। गडकरी का 12 सितंबर को आपरेशन हुआ है और वह स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। आडवाणी ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष 24 सितंबर को दिल्ली आएंगे। मैंने उनसे यात्रा की घोषणा करने का आग्रह किया है। तब तक यात्रा की योजना पूरी हो जाएगी.

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