नई दिल्ली, 15 फरवरी. अल्पसंख्यकों को नौ फीसदी आरक्षण के अपने बयान पर खेद जताने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद पर चुनाव आयोग नरम पड़ सकता है। आचार संहिता के मामले में खुर्शीद की शिकायत राष्ट्रपति से कर चुके आयोग ने उनके उस पत्र पर विचार विमर्श शुरू कर दिया है जिसमें कानून मंत्री ने अपने बयान के लिए खेद प्रकट किया है और आयोग के प्रति सम्मान जताया है।

कुरैशी के रुख में भी बदलाव आने के संकेत

कुछ दिन पहले तक आयोग के निर्देशों की धजियां उड़ाते रहे खुर्शीद के इस बदले हुए तेवर से मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के रुख में भी बदलाव आने के संकेत हैं। सूत्रों की माने तो आयोग खुर्शीद के साथ विवाद के इस अध्याय को बंद करने पर विचार कर रहा है। इस पर पूछे जाने पर कुरैशी का कहना था कि अभी तक इस पर फैसला नहीं हुआ है और व्यस्तताओं की वजह से सोमवार देर रात मिले पत्र पर विचार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

आयोग की राय को भी आधार बनाएंगे

यह भी बताया जा रहा है कि चूंकि कानून मंत्री की शिकायत राष्ट्रपति को भेजी गई थी जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री को विचार के लिए प्रेषित कर दिया था, तो आयोग इस पर पीएम से भी अंतिम तौर पर बातचीत कर सकता है। इसके बाद कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि आयोग अब विवाद को आगे तूल देने के हक में नहीं है। जानकारों की माने तो अगर पीएम भी अपने स्तर पर कोई फैसला सुनाते हैं तो आयोग की राय को भी आधार बनाएंगे।

चुनाव हो चुके राज्यों में आचार संहिता नरम

चुनावी प्रक्रिया से गुजर चुके उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर को सरकार ने राज्य में कार्यो की समीक्षा करने, अधिकारियों के साथ दौरा करने, निविदा आमंत्रित करने और उस पर फैसला लेने का अधिकार दे दिया है। ध्यान रहे कि इससे पहले इन राज्यों की ओर से आचार संहिता में छूट देने की मांग की थी। जवाब में आयोग ने भी दूसरे ही दिन इसकी अनुमति दे दी थी।  आयोग ने औपचारिक रूप से बयान दिया है कि इन राज्यों में आचार संहिता में ढील दी जाएगी। ध्यान रहे कि इन राज्यों में मतदान तो पिछले महीने ही खत्म हो गया, लेकिन नतीजे उत्तर प्रदेश और गोवा के साथ ही छह मार्च को आएंगे।

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