राज्य के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह के सतत् प्रयासों के बाद भी राज्य में रासायनिक खादों की आपूर्ति में भारी कमी बनी हुई है. किसानों के सामने यह भयावह स्थिति आ चुकी है कि यदि इस समय खाद मिलने में देर हो गयी तो फिर उसके मिलने का भी कोई अर्थ नहीं होगा और उनकी फसल व वे स्वयं बर्बाद हो जाएंगे. खेतों के आकार के हिसाब से 10 बोरी और 4 बोरी खाद देने की राशनिंग भी राज्य में लागू कर दी गई. लेकिन इसके बाद भी रासायनिक खाद नहीं मिल रहा है.

मुख्यमंत्री श्री चौहान दिल्ली जाकर केंद्रीय रासायनिक मंत्री श्रीकांत जैना से मिले थे. उन्हें राज्य की इस जरूरत से अवगत कराया था कि मध्यप्रदेश में अन्य राज्यों के मुकाबले बोहनी पहले की जाती है और खाद की जरूरत भी इसी हिसाब से पूरी की जानी चाहिए. श्री चौहान वहां रेल मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी से भी मिले और उन्होंने आश्वस्त किया था कि बंदरगाहों व खाद मिलों से खाद की बोरियां ढोने के लिये मालगाड़ी के 10 रेक प्रतिदिन दिये जायेंगे. लेकिन वास्तविकता से 4 रेक रोज ही मिले. पूरे प्रदेश में रासायनिक खादों को लेकर किसान परेशान है. खाद की कालाबाजारी और उसमें भी धोखाधड़ी खूब चल रही है. सतना में जिला प्रशासन ने नकली खाद का एक गोदाम पकड़ा. किसानों को नकली खाद बेचा जा रहा है. राजगढ़ जिले के जीरापुर में यूरिया खाद की किल्लत से किसान भड़ककर हिंसा पर उतर आये. सड़कें जाम हो गई और कार्यालयों व वाहनों की तोड़-फोड़ की गई. पुलिस की  तरफ में आंसू गैस व लाठी का प्रयोग किया गया. भीड़ उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब मध्यप्रदेश राज्य विपणन सहकारी समिति के आवक-जावक रिकार्ड में आवक तो 10,350 बोरियां बताई गई पर स्टाक में मात्र 130 बोरी मिली. इससे यह स्पष्टï हो गया है कि सहकारी समितियों ने भी भारी मात्रा में खाद काला बाजार में बेचा है. सरकार खाद वितरण की व्यवस्था सहकारी समितियों के माध्यम से ही की जाती है और वहां से भी हजारों बोरी खाद काला बाजार में बेच दिया गया.

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