भोपाल, 29 दिसंबर. राजधानी की बड़ी एवं छोटी झील को उड़ीसा के सतपाड़ा स्थित एशिया की प्रसिद्घ झील चिलका लेक की भांति आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने हेतु योजना तैयार की जायेगी.

भोजताल के किनारे एक म्युजियम भी बनाया जायेगा जिसमें राजाभोज काल से अभी तक राजधानी की उक्त झीलों के विकास की संपूर्ण जानकारी पर्यटकों के अवलोकनार्थ उपलब्ध रहेगी. साथ ही चिल्का लेक की भांति राजधानी की उक्त झीलों के विकास एवं संरक्षण के लिये भारत सरकार से ग्रांट प्राप्त करने हेतु प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जायेगा. नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने महापौर कृष्णा गौर के साथ चिल्का लेक का अवलोकन एवं उसके विकास एवं संरक्षण की जानकारी लेने के बाद यह विचार व्यक्त किये.

बाबूलाल गौर एवं महापौर ने चिल्का डव्लहपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ गुरुवार को एशिया की प्रसिद्घ चिल्का लेक का अवलोकन किया और अधिकारियों से उक्त झील के विकास एवं संरक्षण के लिये किये गये कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की. इस दौरान चिल्का डव्हलपमेंट अथारिटी के एडीशनल चीफ एक्जीक्यूटिव चितरंजन मिश्रा ने बताया कि उक्त लेक 1100 वर्ग कि.मी. में फैला हुआ है. इसका केचमेंट एरिया लगभग 4400 वर्ग कि.मी. है. उक्त लेक के विकास एवं संरक्षण के कार्य में डव्हलपमेंट अथारिटी के 150 कर्मचारी कार्यरत् हैं. चिल्का लेक के अववलोकन के दौरान नगर यंत्री यांत्रिक एम.एम. गर्ग, चिल्का डव्हलपमेंट अथारिटी के प्रोजेक्ट इंजीनियर दिलीप कुमार नायक सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

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