नयी दिल्ली :  चालू वित्त वर्ष में जब बहुप्रतिक्षित जनसंख्या के आंकड़े आए और लिंगानुपात पर नजर पड़ी तो घटते लिंगानुपात को देखकर सब लोक अवाक रह गए. और इसके बाद शुरू हुई बैठकों का दौर लेकिन अगले ही कुछ दिनों में इन बैठकों का परिणाम कागजों तक सिमट कर रह गया. घटते लिंगानुपात मुख्य कारण पर न तो राज्यों को किसी प्रकार की चिंताए हुई और न तो केंद्र सरकार द्वार राज्यों को किसी प्रकार के निर्देश जारी किए जा रहे हैं. यहीं नहीं भ्रूण हत्या करवाने वालों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट भी  तैयार करने में संवेदनहीनता दिखा रही है. अधिकतर मामले रफा-दफा किए जा रहे हैं.

हालांकि इससे उलट मध्यप्रदेश में भ्रूण हत्या जैसे संगीन अपराधों के खिलाफ तेजी से कार्यवाही हुई है बल्कि ऐसे लगभग तीन दर्जन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं.

वर्ष 2010 में देश में सबसे अधिक भ्रूण हत्या के 35 मामले प्रदेश में दर्ज किए गए है.  इसके अलावा पंजाब में 20, राजस्थान में 18 मामलें दर्ज किए गए हैं. दिलचस्प बात है कि वर्ष 2010 में देश में भ्रूण हत्या के खिलाफ मात्र 107 मामले दर्ज किए गए हंै. बिहार, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचलप्रदेश सहित कई ऐसे राज्य हैं जहां पूरे वर्ष में एक भी व्यक्ति के खिलापऊ मामला दर्ज  नहीं किया गया है. ऐसे में महज कल्पना किया जा सकता है कि राज्यों में भ्रूणहत्या करने वालों के खिलाफ कितनी सक्रियता है. हालांकि कुछ राज्यों ने सक्रियता दिखाई है जिसमें भ्रूण हत्या करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र में (17), पंजाब (23), हरियाणा (29) और गुजरात (4) कार्यवाहीं हुई है.

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