भोपाल, 24 अगस्त. मध्यप्रदेश में कुश्ती के खेल की महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हैं जो अन्य राज्यों में नहीं है. जिस तरह से दिल्ली आज देश का सबसे बड़ा केन्द्र है ठीक उसी तरह से मध्यप्रदेश आने वाले वक्त में देश का बड़ा केन्द्र होगा. यह उद्ïगार आज यहां लंदन ओलंपिक खेलों के रजत पदक विजेता सुशील कुमार ने व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रदेश खेलों में काफी आगे बढ़ा है और यह सिलसिला जारी रहेगा.

सुशील कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश में एक से बढ़कर एक पहलवान पैदा हुए. कृपाशंकर पटेल, पप्पू यादव, बुद्घासिंह, लाल जी यादव तेज सिंह, दीनानाथ, रामनाथ हन्नू पहलवान, रामदयाल पहलवान, इसराईल पहलवान आदि मुझे पूरा विश्वास है कि मध्यप्रदेश भी हरियाणा, पंजाब, दिल्ली की तरह से पहलवानी में आगे होगा.

छोटा सुशील कब आएगा?

पहलवान सुशील कुमार से जब सवाल किया गया कि आपकी शादी हो चुकी है अब छोटे सुशील का लोगों को इन्तजार है तो उन्होने मुस्कान भरी और कहा जल्दी क्या है, सबका आशीर्वाद, दुआएं मेरे साथ रही है आगे भी रहेगी तो यह तमन्ना भी पूरी हो जाएगी. लंदन ओलंपिक में भारत के लिए चांदी की चमक बिखेरने वाले पहलवान सुशील कुमार ने अगले रियो ओलंपिक में देश के लिए स्वर्णिम उपलब्धि हासिल करने का प्रयास करने का आज देशवासियों से वादा किया.

मध्य प्रदेश से खेल पुरस्कारों के वितरण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करने आये सुशील कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में यह वादा किया. सुशील ने कहा कि लंदन ओलंपिक के फाइनल में जापानी पहलवान से पहले हमला करने की मामूली भूल होने से वह देश के लिए स्वर्णिम सफलता प्राप्त नहीं कर सकें उसका जीवनभर मलाल रहेगा. लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि उन्हें देश के लिए कुश्ती में चांदी की सफलता प्राप्त करने की भी संतुष्टि है. उन्होंने कहा कि बीजिंग ओलंपिक में उनके कांस्य जीतने के बाद देश के खेलप्रेमियों और सरकारों ने उन्हें काफी सम्मान और सुविधाएं प्रदान की है.

विश्व चैंपियन रह चुके सुशील ने कहा कि बीजिंग सफलता के बाद देश के खेलप्रेमियों का कुश्ती के प्रति रूझान बढऩे और पहलवानों को सम्मान मिलने से उनके सामने लंदन में अपने पदक का रंग बदलने की कड़ी चुनौती थी लेकिन वह इसमें सफल रहे. सुशील ने कहा कि हरियाणा और पंजाब के पहलवान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसलिए ज्यादा सफल हो रहे हैं क्योंकि इन दोनों राज्यों में छोटी उम्र से ही बच्चों को उनके अभिभावक अखाड़ों में भेज देते हैं. उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य प्रदेशों के पहलवानों में प्रतिभा नहीं है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की खेल राजधानी इंदौर के पूर्व पहलवान कृपाशंकर पटेल ने न केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक जीते है बल्कि वह भारतीय कुश्ती टीम के कप्तान भी रहे है.

सुशील ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खेलप्रेमी और खेलों के विकास में अहम योगदान देने वाला नेता बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने लंदन में पदक जीतने वाले सभी खिलाडिय़ों को अगले महीने भोपाल में सम्मानित करने की बात कही है.  सुशील ने कहा कि मध्यप्रदेश के जूनियर पहलवान काफी प्रतिभाशाली हैं. साथ ही राज्य सरकार राज्य कुश्ती अकादमी के पहलवानों सहित अन्य खेलों के खिलाडिय़ों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधा प्रदान कर रही है.

इसे देखते हुए आने वाले वर्षो में निश्चित रूप से यहां के पहलवान अंतर्राष्ट्रीय पटल पर उपलब्धियां हासिल करते नजर आयेंगे. इस प्रयास में वह भी अपना योगदान देंगे, क्योंकि इस अकादमी से वह भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं. पूर्व अंतर्राष्ट्रीय पहलवान महाबली सतपाल के शिष्य एवं दामाद सुशील ने लंदन में मुक्केबाजी और कुश्ती मुकाबलों में तकनीकी खामियों के विवादों के सवाल पर कहा कि मुक्केबाजी विवादों के दौरान उनका पूरा ध्यान अपने कुश्ती मुकाबले में था इसलिए इस संबंध कोई जानकारी नही है. जहां तक कुश्ती का सवाल है तो इसमें ऐसा कोई विवाद नही था.  उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर ओलंपिक में विश्व के चुनिंदा क्वालीफाई करने वाले 19 पहलवानों की चुनौती का सामना करने लिए वर्तमान कुश्ती में तकनीक, गति, ताकत और बुद्धिमता का होना बहुत जरूरी हो गया है.

उन्होंने लंदन में स्वर्ण पदक नहीं जीतने पर पिता की नाराजगी के सवाल पर कहा मेरे पिता आज भी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड में ड्राइवर के पद पर हैं और वह बचपन से हमेशा कड़ी मेहनत और ऊंची उपलब्धि हासिल करने की सीख देते रहे हैं इसलिए उनकी नाराजगी अपनी जगह सही है. सुशील ने निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और मुक्केबाज विजेन्द्र सिंह के लंदन में आशाओं पर खरे नहीं उतरने के सवाल पर कहा कि यह दोनों खिलाड़ी अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं और अभी भी इस पर खरा उतरने का माद्दा रखते है. जहां तक सवाल लंदन का है तो दोनों के लिए अपने मुकाबले के दिन अच्छा नहीं होने से ऐसा हुआ है.

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