एनबीए ने की महेश्वर परियोजना समझौते को रद्द करने की मांग

भोपाल,7 फरवरी, नर्मदा बचाओ आंदोलन ने मध्यप्रदेश सरकार से महेश्वर परियोजना की निजी कंपनी के साथ हुए विद्युत क्रय के समझौते को रद्द करने और इस मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है.

नर्मदा बचाओं आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि आंदोलन को हाल ही में केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय में महेश्वर परियोजना के संबंध में पिछले वर्ष हुई तीन बैठकों के दस्तावेज प्राप्त हुए है. इन दस्तावेजों में यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि नर्मदा पर निजी एस कुमार्स कंपनी द्वारा बनाई जा रही 400 मेगावाट की महेशवर परियोजना से बनने वाली बिजली की कीमत दस रूपये प्रति यूनिट होगी. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के वर्ष 2011-12 के टेरिफ आदेश के अनुसार बिजली की खरीदी की कीमत 2.44 रूपये प्रति यूनिट है. जबकि प्रदेश में बन रही निजी एस्सार और टोरेंट कंपनी की दो नई परियोजनाओं में बनने वाली बिजली की कीमत क्रमश: 2.45 और 3.31 रूपये प्रति यूनिट है.

हिमाचल प्रदेश की इस प्रकार की दो समान परियोजनाओं कंचम वांगअू और बासपा टू से बनने वाली बिजली की कीमत क्रमश: 3.19 और 2.61 रूपये प्रति यूनिट है. जबकि महेश्वर परियोजना में बनने वाली बिजली देश की सबसे महंगी बिजली होगी. अग्रवाल ने बताया कि केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय की इन बैठकों में मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश सरकार से महेश्वर परियोजना की बिजली दस रूपये प्रति यूनिट खरीदने का निर्णय लेने की मांग कर रही है. लेकिन राज्य सरकार द्वारा इस कीमत पर बिजली खरीदने की सहमति नही दी है. यदि राज्य सरकार इस पर सहमति प्रदान करती है तो यह प्रदेश के लिए बहुत आत्मघाती होगा. क्योंकि इससे अगले 35 वर्षो में प्रदेश की जनता के 20 हजार करोड रूपये से अधिक की राशि इस निजी परियोजनाकर्ता को दिये जायेंगे. अग्रवाल ने बताया कि निजीकरण के पहले महेश्वर परियोजना की कीमत 465 करोड रूपये थी. इसके बाद इस परियोजना का निजीकरण होने पर इसमें पैसा लगा रही वित्तीय संस्थाओं ने इसकी कीमत 2254 करोड रूपये आंकी गई थी.

इस कीमत पर मंजूरी मांगे जाने पर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण ने इस कीमत को अलाभदायक पाते हुए मात्र 1673 करोड रूपये की कीमत पर तकनीकी आर्थिक मंजूरी प्रदान की. लेकिन इसके बावजूद भारतीय वित्तीय संस्थाओ और बैकों ने इस परियोजना में लगभग 2500 करोड का सार्वजनिक रूपये लगा दिया है. जबकि इसकी कीमत बढकर वर्तमान में 4200 करोड रूपये से उपर पहुंच चुकी है और इसमें प्रभावितों के पुनर्वास की वास्तविक कीमत शामिल नही की गई है. श्री अग्रवाल ने बताया कि इस परियोजना से 61 गांवों में लगभग पांच से छह हजार लोग डूब में आ रहे है. इन प्रभावितों को पुनर्वास नीति और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई मंजूरी की शर्तो के अनुसार जमीन के बदले कृषि भूमि न्यूनतम पांच एकड जमीन और अन्य सुविधाएं नही दी गई है. उन्होंने राज्य सरकार से महेश्वर परियोजना की निजी कंपनी एस कुमार्स के साथ हुए विद्युत क्रय समझौते सहित अन्य समझौतों को रद्द करने और परियोजना के संबंध में दी गई सभी गारंटी वापस लेने की मांग की है. साथ ही सीबीआई से इस बात की जांच कराई जाये कि परियोजना अलाभदायक होने के बावजूद इसमें आम जनता का 2500 करोड रूपये क्यों लगाया गया है.

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