लोकव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल 16 मई. विज्ञान लोकव्यापीकरण का क्षेत्र व्यापक है. इसमें गणित और स्वास्थ्य विषय भी समिलित है. आज लोगों को विज्ञान के इतिहास से परिचित कराने की आवश्यकता है. पृथ्वी पर संसाधन सीमित है और उपयोगकर्ता असीमित. प्रकृति और संसाधनों के साथ तालमेल बनाकर ही प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा सकते है.

ये विचार म.प्र. शासन के वैज्ञानिक सलाहकार एवं परिषद के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के वर्मा ने बुधवार को विज्ञान भवन में शक्र पारगमन की तैयारियों के संदर्भ में संशाधन व्यक्तियों के लिये आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्ïघाटन सत्र को संबोधित करते हए व्यक्त किये. प्रशिक्षण में पूरे प्रदेश से लगभग 60 व्यक्ति भाग ले रहे है. प्रो. वर्मा ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका रोशनी की भांति है, जो अज्ञानता का अंधकार दूर करते है. उन्होंने कहा कि विज्ञान संचारक विज्ञान की भावनाओं गूढ़ बातों और नई खोजों की जानकारियां लोगों तक पहुंचाता है. इसके लिये सशक्त नेटवर्किंग बनाने और उसके  विस्तार की आवश्यकता है.

परिषद के कार्यकारी संचालक अजित श्रीवास्तव ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहाकि प्रशिक्षण ले रहे संसाधन व्यक्ति 6 जून को होने वाले शक्र पारगमन के अवलोकन के साथ इसके उद्ïदेश्यों सावधानियों और प्रयोगों के बारे में भी बताये. उन्होंने कहा कि आज के दौर में विषयों के विभाजन की दीवार खत्म हो चुकी है और इंटर डिसीप्लीनरी एप्रोच को अपनाया जा रहा है. कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. मंजुलता जैन ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डा. सुनील गर्ग ने दिया.

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