राजधानी भोपाल व्यापारिक राजधानी इंदौर में नगरीय यातायात के रूप में मेट्रो रेल (लोकल ट्रेन) की योजना को और आगे बढ़ा दिया गया है. इस मामले में अग्रणी दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन को विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने की स्वीकृति राज्य शासन ने दे दी है. मुंबई से देश में रेल का चलन ब्रिटिश शासन काल में हुआ और उसी नगर में नगरीय यातायात के रूप में ”लोकल  ट्रेन” की व्यवस्था प्रारंभ हुई. अब यह चेन्नई से कोलकाता के बाद दिल्ली तक पहुंच गई है. मुंबई की प्रचलित भाषा में इन्हें ”लोकल” ही कहा जाता है. लेकिन कोलकाता और अब दिल्ली में इस व्यवस्था को ”मेट्रो” कहा जाने लगा है. मुंबई के महानगर के विकास के समय ही यह लोकल व्यवस्था जमीन के ऊपर चलने वाली व्यवस्था बनायी जा सकी और यह पूरे नगर में हर जगह पहुंचती है. इसे मुंबई की गति या जीवन रेखा भी कहा जाता है.  लेकिन हुगली नदी के कारण कोलकाता की मुख्य रेल प्रणाली हावड़ा तक ही रही. बाद में उसे नगर में पहुंचाया गया. अभी कुछ दशकों पूर्व ही लंदन की ट्यूब रेलवे के अनुसार अंडर ग्राउंड मेट्रो बनाया गया. इसमें कई दिनों तक कोलकाता की सड़कें खुदी पड़ी रहीं और इस पर लागत भी बहुत ज्यादा आई. इसलिए दिल्ली में मेट्रो रेल को जमीन और खंभों के ऊपर चलने वाली बनाया गया. दिल्ली में मेट्रो रेल व्यवस्था का श्रेय इंजीनियर श्री श्रीधरन को दिया जाता है.

अब अन्य शहर भी विशेषज्ञ के रूप में दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन को ही यह काम सौंपते है. मध्यप्रदेश सरकार ने भी इसी दिल्ली मेट्रो कारपोरेशन को राज्य के भोपाल व इंदौर महानगरों में नगरीय यातायात के लिये मेट्रो रेल व्यवस्था बनाने का काम सौंपा है. इन दोनों योजनाओं पर 17 हजार करोड़ रुपयों की लागत आयेगी. शासन इस पर भी विचार कर रहा है कि वे रेल प्रशासन से यह कहे कि भोपाल के आसपास के नगरों, सीहोर, शुजालपुर, विदिशा, इटारसी तक लोकल ट्रेन चलायें. क्योंकि इन नगरों से हजारों लोग भोपाल काम करने आते जाते हैं. इन क्षेत्रों में मेट्रो योजनाओं के लिये सरकार हर साल अपने बजट से 500 करोड़ रुपयों का प्रावधान करेगी. साथ ही इसमें केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता ली जाएगी. उम्मीद है कि यदि सभी कुछ योजनाबद्ध तरीके से चलता रहा तो भोपाल-इंदौर में मेट्रो रेलवे 2017 से प्रारंभ की जा सकेगी. इन्हें कई जगह जमीन पर व कई जगह खंभों पर मार्ग बनाकर चलाया जायेगा.

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