ग्रामीण रोजगार में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ने देश में ग्रामीण क्षेत्रों में निश्चित रूप से बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन किया है. ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी में बहुत इजाफा हो गया. निजी काम कराने वाले भी ग्रामीण मजदूर को मनरेगा के समान ही मजदूरी देने के लिए बाध्य हो गए हैं.

भारत में शासकीय -प्रशासकीय भ्रष्टïाचार अपनी चरम सीमा पर हर क्षेत्र में हर जगह पहुंच गया है. उसका प्रभाव मनरेगा पर भी पड़ा. जब फर्जी जाब कार्ड, ठेकेदारों से काम कराना, जाब कार्ड को एक मुश्त कुछ रकम देकर खरीद लेना या रहन रखना आदि होने लगा. इस पर जितना संभव हो सक रहा है उतना ध्यान भी दिया जा रहा है लेकिन इस सबके बाद भी मनरेगा की अपनी महती उपयोगिता बनी हुई है. मनरेगा में 30 नये काम जोड़े गए हैं जिनमें से 22 खेती से जुड़े काम हैं. मनरेगा में 70 प्रतिशत रोजगार उस समय दिये जाते हैं जब किसान और खेतिहर मजदूर के पास खेती का कोई काम नहीं रहता है. इससे खेती के समय लोग समय पर अपनी खेती का काम भी कर लेते हैं. मनरेगा में एक निरंतर फंड बनाए रखा जाता है.अच्छी वर्षा के समय खेती का काम शुरू हो जाने से मनरेगा में मजदूरों की कमी भी आती है. यह इस बात को प्रमाणित करती है कि लोग किसानी कामों में लग गए हैं.
मनरेगा में आए भ्रष्टïाचार को मिटाने के लिए ऑडिट का काम भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से कराया जा रहा है. इनकी रिपोर्ट नवम्बर तक आ जायेगी और उसके अनुरूप मनरेगा में भ्रष्टïाचार मिटाने की कार्यवाहियां शुरू हो जायेंगी. सबसे ज्यादा शिकायतें यह आ रही हैं कि ग्रामीण स्तर पर अधिकारी फर्जी जाब कार्ड सबसे ज्यादा बना रहे हैं. भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस से किया जाता है. इससे ऐसे भ्रष्टï लोग पकड़ में आ जायेंगे.

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