नई दिल्ली, 2 फरवरी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना [मनरेगा] में भ्रष्टाचार को देश के गरीब लोगों के साथ बड़ा अन्याय बताते हुए भरोसा दिलाया कि इसे दूर करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाएगी.

इसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए योजना को सूचना के अधिकार कानून के तहत लाने का वायदा किया गया. मनरेगा के पांच साल पूरे होने के अवसर पर यहां विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने वायदा किया कि इस योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने लिए इसके तंत्र में सुधार लाया जाएगा और ऐसी प्रौद्योगिकी को उपयोग में लाया जाएगा जिससे इसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सके. मनमोहन ने 15 दिन के भीतर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों का बायोमीट्रिक डाटा [उंगलियों और पुतलियों के फोटो पहचान] तैयार कराने की बात कही.  उन्होंने कहा कि इससे मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति और उन्हें किए जाने वाले वेतन भुगतान को लेकर धांधलियों को रोका जा सकेगा. इस अवसर पर सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार ना सिर्फ देश के गरीबों के प्रति अन्याय है बल्कि महात्मा गांधी के नाम पर अपराध करने जैसा भी है. उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों, खासकर ऐसे राज्य जो अपेक्षाकृत गरीब माने जाते हैं, वहां मनरेगा को लागू करने को लेकर उदासीनता साफ दिख रही है.

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