मध्य प्रदेश ने जहां प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह से राज्य के बाढ़ पीडि़तों के लिये 525 करोड़ रुपयों की आर्थिक सहायता की मांग की, जहां उन्होंने यह दावा भी पेश कर दिया कि मध्य प्रदेश को बासमती चावल उत्पादक राज्य की सूची में शामिल किया जाये. अभी तक देश में वही राज्य जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ में मुख्य खेती चावल की ही होती है और यह वहां के लोगों का मुख्य आहार है, लेकिन पंजाब, हरियाणा इसका अपवाद है. यह राज्य धान खूब पैदा करते हैं, लेकिन यहां के लोग चावल खाते नहीं हैं. वहां गेहंू मुख्य आधार है, लेकिन मध्य प्रदेश में ज्यादातर गेहूं ही भोजन का मुख्य आधार है, पर यहां चावल भी काफी खाया जाता है. यहां गेहं चावल दोनों की मांग है. संयुक्त मध्य प्रदेश का दक्षिणीभाग छत्तीसगढ़ जो अब पृथक राज्य है. धान का कटोरा कहलाता है.

हर फसल की कई किस्में होती हैं, लेकिन उनमें चावल की सबसे ज्यादा किस्में है. मध्यप्रदेश के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर रिछारिया ने धान पर शोध का बहुत बड़ा काम किया है. वे धान की सभी किस्मों के बारे में जानते और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिक थे. धानों की किस्मों में ‘बासमती’ सिरमौर है. यह धानं का राजा है और इसमें भी कई प्रजातियां है. शोहरत के नाम पर उत्तराखंड का देहरादून बासमती का नाम दुनिया में सबसे ऊपर है.
अब मध्यप्रदेश में भी धान की खेती बहुत तेजी से बढ़ी है. राज्य में यह 60 हजार हेक्टेयर में होती है. राज्य में बासमती की खेती काफी हो रही है. पुराने दस्तावेजों  व गजेटियर आफ इंडिया के अनुसार  मध्यप्रदेश में पंजाब व हरियाणा में पहले से ही बासमती पैदा हो रहा है. भिंड, मुरैना व सीहोर में बासमती की बहुत उन्नति किस्म की खेती हो रही है. बासमती की मिलिंग के लिये रायसेन व कटनी में मेगा स्तर के प्लान्ट लगे हुए  है. मुख्यमंत्री ने मांग की है कि मध्यप्रदेश को अपीडा संस्था का जी.आई. सर्टीफिकेशन दिया जाए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: