शाहरुख खान केवल नाम के बॉलीवुड के बादशाह नहीं हैं बल्कि उन्हें यकीन है कि वह सर्वश्रेष्ठ हैं. सुपरस्टार का दर्जा प्राप्त कर चुके शाहरुख इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि हिंदी फिल्म जगत में प्रतिस्पर्धा के मामले में उनके सामने कोई टिक नहीं सकता क्योंकि उनके पास एक भावनात्मक लक्ष्य है और उनका काम करने का अंदाज भी औरों से हटकर है.

प्रबंधन गुरु और फिल्म निर्माता अरिंदम चौधरी तथा उनकी पत्नी रजिता ने शाहरुख खान शीर्षक से एक किताब लिखी है. इसी किताब के विमोचन के अवसर पर शाहरुख ने अपनी सफलता के बारे में बेहिचक बातें करते हुए बताया कि उन्होंने फिल्म उद्योग में लोगों को कांटे का टक्कर कैसे दिया?

शाहरुख ने कहा, लोगों को लग सकता है कि मैं खुद को कुछ ज्यादा महत्व देता हूं लेकिन मुझे लगता है कि कोई मुझे टक्कर नहीं दे सकता है क्योंकि मेरे पास एक वास्तविक भावनात्मक लक्ष्य है. मैं खेल न खेलने का निर्णय लेकर अपनी प्रतियोगिता को कड़ी चुनौती के रूप में लेता हूं. मैं खेल को बदलने में विश्वास करता हूं. मैं औरों से हटकर फिल्मों का चयन करता हूं इसलिए ऐसे लोग मेरे प्रतियोगी बन ही नहीं पाते. उनकी दौड़ बिल्कुल अलग है.

प्रतिस्पर्धा में जीतने का मतलब किसी की सफलता को नजरअंदाज करना नहीं है. इस खेल में आपको अपनी अलग समानान्तर रेखा बनाने की जरुरत है. यह फैसला आपको करना पड़ेगा कि कैसे खेल को ही बदल देना है. मैंने अपने जीवन में हमेशा खेल को बदलने का निर्णय किया है. मैं सपने बेचने में बहुत अधिक विश्वास करता हूं. यहां हर एक चीज कीमत चुका कर पाई जाती है. यहां तक कि यह जीवन भी मौत की कीमत पर मिलता है. मां-बाप और उनके बच्चों के बीच भावनात्मक सम्बंध के अलावा यहां हर चीज बिकाऊ है. मैं भी यहां मुफ्त में नहीं आया हूं.

आप मुझसे किसी फिल्म में आइटम नम्बर या शादी के अवसर पर नृत्य करवा सकते हैं. अगर यह लोगों के चेहरे पर मुस्कान दे सके तो मैं यही काम गली के थिएटर में भी काम कर सकता हूं. अगर मेरा सपना लोगों को मुस्कान देता है तो मुझे अपने सपनों के सौदागर होने पर गर्व है.

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