तेहरान, 29 अगस्त. भारत ने ईरान में मंगलवार से शुरू हुई गुट निरपेक्ष देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का आह्वान किया है.  वैश्विक आर्थिक संस्थानों की नीतियां विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखकर निर्धारित करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बड़े बदलाव करने की वकालत की.

बैठक में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने सीरिया के हालात पर चिंता जताते हुए वहां सैन्य कार्रवाई से बचने पर जोर दिया. लास्टिंग पीस थू्र ज्वाइंट ग्लोबल गवर्नेस पर बोलते हुए कृष्णा ने वैश्विक परमाणु निशस्त्रीकरण के लिए ज्यादा सक्रिय गुट निरपेक्ष आंदोलन की मांग की. आतंकवाद पर उन्होंने कहा कि यह हमारे समय की सबसे बड़ी आफत है. आतंकवाद हमारे बहुवादी सामाज के सामाजिक-आर्थिक तानेबाने को क्षति पहुंचा रहा है. हमें आतंक के खिलाफ उच्चस्तरीय लड़ाई की जरूरत है.

तेहरान में विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू

गुट निरपेक्ष शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संगठनों में जरूरी बदलाव के बिना सुधार प्रक्रिया अधूरी होगी. प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि गुट निरपेक्ष आंदोलन ने हमेशा विनाशकारी टकराव टालने के साथ आर्थिक व सामाजिक विकास का रास्ता तलाशा है. सिंह 30-31 अगस्त हो रहे 120 सदस्यीय गुटनिरपेक्ष आदोलन के 16वें शिखर सम्मेलन से इतर बाग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करेंगे. देशों के शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने विश्व व्यवस्था को चलाने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बड़े सुधार के लिए कोशिशों का नारा बुलंद किया है. बैठक के लिए ईरान रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सीरिया संकट, आर्थिक मंदी समेत दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है कि गुट निरपेक्ष देश प्रशासनिक ढांचे को और अधिक लोकतांत्रिक मजबूत बनाने के लिए आवाज बुलंद करें.

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार ईरान पहुंचे मनमोहन सिंह तेहरान में कई मुल्कों के नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे. मंगलवार दोपहर ईरान रवानगी से पहले दिए बयान में प्रधानमंत्री ने गुट निरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते रहे अमेरिका को भी सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि मैं जोर देकर इस बात को कहना चाहूंगा कि गुट निरपेक्ष आंदोलन के उद्देश्य अब भी प्रासंगिक हैं. खासतौर पर ऐसे वक्त में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है और भू-राजनीतिक परिदृश्य अनिश्चितता के साथ बदल रहा है.

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