पंच कल्याणक हेतु निकली कलश यात्रा

भोपाल, 21 फरवरी. श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंच कल्याणक चौबीसी प्रतिष्ठï की शुरूआत घट यात्रा के साथ हुई जैन मंदिर बैरागढ़ से गाजे-बाजे के साथ घट यात्रा प्रारंभ हुई. जिसमें सबसे आगे धर्म ध्वजाएं और शहनाई के साथ नाचते गाते इंद्र और साथ में के सिर पर मंगल कलश धारण कर इंद्राणियां मंगल गीत गाते हुए चल रही थी.

पंच कल्याणक महोत्सव में प्रतिष्ठित होने वाली चौबीस तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को प्रमुख पात्र  जिसमें पदम जैन, अनुज जैन, नीरज जैन, अरविंद जैन आदि सुसज्जित बग्गियों में बैठे थे. कलश यात्रा बैरागढ़ के विभिन्न मार्गो से होती हुई, आयोजन स्थल पहुँची. यहाँ मंडल शुद्घि पात्र शुद्घि आदि विभिन्न धार्मिक क्रियाएं विधि-विधान से ब्रम्हचारी सुमत व अनिल भैया के निर्देशन में संपन्न हुई. मुनि मार्दव सागर महाराज ने आशीष वचन में कहाकि ओम शब्द पूरी सृष्टिï का आधार है. उसी प्रकार मंगल कार्यो के लिए मंगलाचरण होता है. पंच कल्याणक की प्रक्रिया परभव की व्यवस्था है. यहाँ के दु:ख और सुख के आधार पर नरक और स्वर्ग की अनिभूति होती है. जो आत्मा और स्वयं को नहीं मानता वह नास्तिक कहलाता है परंतु हम सबको प्रभु चरणों में समर्पित होकर आस्तिक बनकर यह धार्मिक कार्य करना है. बुधवार को प्रात: अभिषेक नित्य नियम पूजन, दोपहर 1 बजे याग मंडल विधान और रात्रि में आरती के बाद सौ धर्म इन्द्र का दरबार ततव चर्चा कुबेर द्वारा रत्न वृष्टिï, सौलह स्वप्र, अष्टï कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण और मध्य रात्रि में गर्भ कल्याणक की आंतरिक क्रियाओं का मंचन होगा. मुनिश्री चिन्मय सागर महाराज ने नयापुरा जैन मंदिर में दान के महत्व को प्रतिपादित करते हुए. अपने प्रवचन में कहा कि जो देता है वह देता है और रखता है वह राक्षस. ज्ञानी तो इशारे से ही देने की तैयार हो जाता है मगर कुछ लोग ऐसे भी है जो गन्ने की तरह कुटने पिटने के बाद ही देने को राजी होते है. जब तुम्हारे मन में देने का भाव जागे तो समझना पुण्य का उदय आया है.

धार्मिक और सत कार्यो में अपने होश हवास में ही दान दे डालो क्योंकि जो दिया जाता है वह सोने का हो जाता है जो बचा लिया जाता है वह मिट्ïटी का हो जाता है. भिखारी भी भीख में मिली रोटी, तभी खाये जब वह इसका एक टुकड़ा कीड़े-मकोड़े को डाल दे अगर वह ऐसा नहीं करता तो जन्मो तक ब्खिारी बना रहेगा. जिंदगी में अगर सुकून चाहते हो तो बटोरना नहीं देना सीखो. इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अनिल जैन, दानिश कुंज, मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन, आनंद मोदी, नरेंद्र जेन, रतन लाल जैन आदि मौजूद थे. प्रवक्ता सुनील जैनाविन व अंशुल जैन ने बताया कि 26 फरवरी को मुनिश्री चिन्मय सागर महाराज जंगल वाले बाबा के सानिध्य में भारत वर्ष की प्रथम रत्नों की चौबीसी का निर्माण कार्य का शिलान्यास होगा.

पूज्य मुनि श्री चिन्मय सागर के सानिध्य में अधिवेशन सम्पन्न

श्री चिन्मय सागर महाराज जंगल वाले बाबा के पावन सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन मंदिर सोनागिरी में प्रांतीय महासभा का अधिवेशन संपन्न हुआ. इनमें शिक्षण हेतु जयपुर एवं मुरैना आदि से विद्वान पंडित एवं उदासीन आश्रम इंदौर से शिक्षिकाएं पधारी थी, सभी विद्यार्थियों को नि:शुल्क पुस्तके एवं अन्य सामग्री महासभा द्वारा प्रदान किए गए थे इसके अतिरिक्त महासभा द्वारा साधनहीन विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता निधी से सहयोग देने का कार्य भी प्रारंभ किया जा चुका है . इस वर्ष श्रुत पंचमी के अवसर पर बच्चों के ग्रीष्म अवकाश के समय पुन: शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में शिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा. श्री पाटनी ने सभी मंदिर के अध्यक्षों से एवं उपस्थित समाज से अनुरोध किया कि ग्रीष्म अवकाश के समय लगने वाले इन शिविरों में सभी अपने बच्चों को संस्कारर एवं शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करें. मुनिश्री ने महासभा के कार्यों की सराहना करते हुए आशीष वचन कहे, सम्मेलन में प्रांतीय अध्यक्ष अजित पाटनी महामंत्री विजय कासलीवाल एवं कार्याध्यक्ष चन्दू लाल जैन एवं राजधानी के प्रमुख मंदिरों के अध्यक्षों तथा संभाग दिगम्बर जैन महिला महासभा के पदाधिकारियों ने मुनिश्री को श्री फल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किए.

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