नई दिल्ली, 19 दिसंबर. संसद पर एक बार आतंकवादी हमला हो चुका है। हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी हायतौबा मच चुकी है। हमले के बाद संसद में बॉडी स्कैनर लगाने और सीसीटीवी कैमरे की नजर और तेज करने की पुरजोर पैरवी की गई।

इसके बावजूद 2008 में बॉडी स्कैनर लगाने की बनी योजना चार साल बाद भी परवान नहीं चढ़ी है। संसद की सुरक्षा के जिम्मेदार अतिरिक्त सचिव [सुरक्षा] पीआर मीना इस बारे में कुछ भी कहने से साफ इंकार करते हैं। जबकि लोकसभा सचिवालय के सूत्र सिंगापुर की कंपनी स्मिथ डिटेक्शन वीकोन सिस्टम्स द्वारा बॉडी स्कैनर के डेमो किए जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन आगे क्या हुआ, इस बारे में नहीं बता पा रहे हैं। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के कार्यकाल में बॉडी स्कैनर लगाने का विचार सबसे पहले आया था। तब संसद की सुरक्षा संबंधी समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल ने निजता की सुरक्षा के नाम पर सांसदों के विरोध की आशंका जताई थी। आशंका को देखते हुए कहा गया कि स्कैनरों का इस्तेमाल उन्हीं चीजों का पता लगाने में किया जाएगा जिनसे खतरा उत्पन्न होने की संभावना होगी। प्रक्रिया में निजता की रक्षा की गारंटी की बात भी कही गई। करिया मुंडा समिति ने मार्च, 2010 में सिंगापुर की कंपनी से भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड को इन मशीनों के डेमो का निर्देश देने के लिए कहा था। समिति ने सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को इनकी व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए विभिन्न देशों में भेजने का भी सुझाव दिया था। पिछले दिनों इजरायली कंपनी नाइस ने संसद परिसर में सीसीटीवी का डेमो किया था। वैसे सीसीटीवी का संचालन अब भी पूरी तरह तकनीकी विभाग के हवाले नहीं किया गया है। तकनीकी विभाग का कहना है उनके यहां 176 की जगह 60 विशेषज्ञों से काम चलाया जा रहा है।

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