पीएम आवास में आज दिया जाएगा लंच!

नयी दिल्ली, 16 अगस्त. भारतीय खेलों के इतिहास में 16 अगस्त 2012 का दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया जब लंदन ओलंपिक में पदक जीतने वाले देश के छह जांबाज खिलाडियों ने ऐतिहासिक इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी.

लंदन में पदक जीतने वाले छह खिलाडियों रजत विजेता पहलवान सुशील कुमार और पिस्टल निशानेबाज विजय कुमार तथा कांस्य विजेता राइफल निशानेबाज गगन नारंग, पहलवान योगेश्वर दत्त, बैडमिंटन खिलाडी सायना नेहवाल और महिला मुक्केबाज एम सी मैरीकोम को केन्द्रीय खेल मंत्री अजय माकन ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के खुले लान में आम जनता के बीच नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया. भारतीय खेलों के इतिहास में 16 अगस्त 2012 का दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया जब लंदन ओलंपिक में छह पदक जीतकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का इतिहास बनाने वाले देश के छह जांबाज खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से खुली जीप में सवार होकर ऐतिहासिक इंडिया गेट स्थित (अमर जवान ज्योति) पहुंचे.

लंदन में पदक जीतने वाले छह खिलाडिय़ों रजत विजेता सुशील कुमार और विजय कुमार तथा कांस्य विजेता गगन नारंग, योगेश्वर दत्त, सायना नेहवाल और एमसी मैरीकोम को केन्द्रीय खेल मंत्री अजय माकन ने नेशनल स्टेडियम के खुले लान में आम जनता के बीच नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया. माकन ने इस अवसर पर कहा प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह शुक्रवार को अपने आवास पर इन चैंपियनों सहित उन सभी 81 खिलाडिय़ों से मुलाकात करेंगे जिन्होंने ओलंपिक में हिस्सा लिया था. इस मौके पर संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद रहेंगी. माकन ने बताया कि इन सभी पदक विजेताओं का शाम को संसद में सम्मान किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाडिय़ों को शनिवार को आमंत्रित किया है.

खेल मंत्री अजय माकन ने सम्मान समारोह में रजत विजेताओं को 30-30 लाख और कांस्य विजेताओं को 20-20 लाख रुपये के चेक प्रदान किये लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि खेल मंत्री ने खिलाडिय़ों को खुद यह चेक न देकर नेशनल स्टेडियम में कम एंड प्ले योजना के छह चैंपियन बच्चों से ये चेक दिलवाये. इस सम्मान समारोह के बाद ये छह पदक विजेता खुली जीप में सवार होकर नेशनल स्टेडियम से अमर जवान ज्योति तक पहुंचे.
उस समय रास्ते में दोनों तरफ हजारों लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था. हर कोई खिलाडिय़ों को नजदीक से छूकर देखना चाहता था. पहली जीप में सबसे आगे पहलवान सुशील और योगेश्वर अपने गुरु महाबली सतपाल के साथ सवार थे. इसके बाद की अलग-अलग जीपों में शेष चार खिलाड़ी सवार थे. यह काफिला जैसे जैसे इंडिया गेट की तरफ बढऩे लगा पूरा माहौल देश भक्ति से ओत-प्रोत हो गया. यह ऐसा दृश्य था जो आज से पहले कभी भारतीय खेलों में देखा नहीं गया था.

अब तो सिर्फ गोल्ड बचता है और रियो में पूरी कोशिश करूंगा : सुशील

बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले करिश्माई पहलवान सुशील कुमार ने आज कहा कि अब तो सिर्फ स्वर्ण ही बचता है जिसके लिए वह रियो डी जेनेरो में अगले ओलंपिक में पूरी कोशिश करेंगे. सुशील ने यहां विज्ञान भवन में भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बातचीत में कहा मुझे लंदन ओलंपिक में भारतीय ध्वजवाहक की जो अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी थी उससे मेरा हौसला काफी बुलंद हुआ था और मेरी पूरी कोशिश थी कि मुझे देश के लिए पदक हासिल करना है. मुझे खुशी है कि मैं पदक का रंग बदलने में कामयाब रहा. चैंपियन पहलवान ने कहा कि बीजिंग के कांस्य पदक और लंदन के रजत पदक के बीच उन्होंने मास्को में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतने में भी कामयाबी हासिल की और अब उन्हें इसी कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए रियो तक पहुंचना है.

उन्होंने कहा ओलंपिक के लिए मेरी तैयारी बहुत अच्छी रही थी और ध्वजवाहक बनने के लिए उद्घाटन समारोह में शामिल होने का मेरी तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ा था. मुझे इस बात की भी बहुत खुशी है कि मेरे साथी पहलवान योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक का अपना सपना पूरा किया है. सुशील ने कहा कि हम दोनों के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि हम एक ही गुरु महाबली सतपाल के शिष्य और हम दोनों ने एक ही ओलंपिक में पदक हासिल कर लिया. महाबली यतपाल के शिष्य ने कहा कि 15 दिन के विश्राम के बाद मैं अगली मंजिल की तैयारी के लिए जुट जाऊंगा. जापानी पहलवान के खिलाफ फाइनल मुकाबले से पहले की परिस्थितियों के बारे में पूछे जाने पर सुशील ने कहा कि वजन कम करने के कारण डिहाइड्रेशन की कुछ शिकायत हो गयी थी.

यदि मुकाबले बराबर चलते रहते तो परिणाम कुछ और ही हो सकता था क्योंकि शरीर उस समय गर्म था और लय बनी हुई थी. जापानी पहलवान के खिलाफ अपनी रणनीति के बारे में पूछे जाने पर सुशील ने कहा कि मैंने तीन घंटे के ब्रेक में पूरा विश्राम किया था और उससे लडऩे की रणनीति बनायी थी. मेरी रणनीति थी कि मैं उस पर तब अटैक करूं जब राउंड में समय कम बचा हो लेकिन वह पहले स्कोर कर गया और फिर डिफेंस पर आ गया. सुशील ने कहा कि कुश्ती में इस बार दो पदक आने से निश्चित ही देश में इस खेल को लेकर रुझान बढ़ेगा और ज्यादा से ज्यादा युवा कुश्ती को अपनाएंगे.

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