राजनीतिक दलों में मतभेद बरकरार

नई दिल्ली, 14 दिसंबर,नससे. प्रभावी लोकपाल लाए जाने को लेकर प्रधानमंत्री की तरफ से बुधवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में आम सहमति नहीं बन पाई.

सरकार और राजनीतिक दलों में कई विवादित मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं. सहमति न बन पाने से चालू सत्र में लोकपाल बिल संसद में न आने के हालात बनते जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि सरकार ने विपक्षी दलों को शीतकालीन सत्र में ही बिल लाने संबंधी किसी तरह का भरोसा नहीं दिलाया है. लिहाजा साढ़े तीन घंटे चली बैठक बेनतीजा ही खत्म हो गई. बैठक के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने लोकपाल को लेकर अपनी-अपनी बिसात बिछा दी. भारतीय जनता पार्टी जहां सीबीआई को लोकपाल के दायरे में अड़ गई वहीं बीजू जनता दल ने भी भाजपा के सुर में सुर मिलाया. भाजपा का कहना था कि कर्मचारियों के ग्रुप सी व डी को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाए.उधर सीपीआई ने गुप सी को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की वकालात की. पार्टी का यह भी कहना था कि लोकपाल की संसद के प्रति जवाबदेही तय हो तथा इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाए. लेफ्ट का कहना था कि प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए. अकाली दल ने लोकपाल को स्वतंत्र दर्जा दिए जाने की पैरवी की. शिवसेना की राय एकदम जुदा थी कि लोकपाल की कोई जरूरत ही नहीं है. रामविलास पासवान ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला ना ले. इसी तरह अन्य दलों ने भी बैठक के दौरान अपनी-अपनी राय पेश की.हालांकि बैठक की शुरूआत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि लोकपाल विधेयक को दलगत राजनीति से अलग रखते हुए सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति से पारित किया जाना चाहिए.

सर्वदलीय बैठक की शुरूआत में प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि मैं निजी तौर पर यह चाहता हूं कि लोकपाल विधेयक सभी राजनीतिक दलों की आम सहमति से पारित हो. यह राजनीति करने का विषय नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मौका है जहां हमें राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखना है. सरकार चाहती है कि संसद के इसी सत्र में लोकपाल विधेयक को पारित करने के लिए हमें सभी प्रयास करने चाहिए, जो आम सहमति पर आधारित होना चाहिए.इससे पहले चर्चा में भाग लेने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उम्मीद जताई थी कि लोकपाल विधेयक पर राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बन जाएगी.मुखर्जी से जब यह पूछा गया कि क्या विधेयक के प्रारूप को बैठक में अंतिम रूप दे दिया जाएगा तो उन्होंने इसके जवाब में कहा कि हम ?सी ही उम्मीद करते हैं. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने उम्मीद जताई कि विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश हो जाएगा. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में लाने और उसे पारित करवाने के लिए सभी प्रयास कर रही है. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि लोकपाल विधेयक से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर राजनीतिक दलों में आम राय हो. उन्होंने कहा कि लोकपाल विधयेक लाने पर जिस प्रकार आम सहमति थी, हम चाहते हैं इसके पारित होने पर भी आम सहमति रहे.

मुंबई में अनशन पर बैठ सकते हैं अन्ना

दिल्ली में बढ़ती सर्दी को देखते हुए अन्ना हजारे लोकपाल विधेयक पर इस महीने की 27 तारीख को प्रस्तावित अपना अनशन दिल्ली के रामलीला मैदान की जगह मुंबई के आजाद मैदान में कर सकते हैं. अन्ना हजारे की कोर कमेटी की आज हुई बैठक में यह फैसला किया गया. संसद के शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल विधेयक पारित नहीं होने की स्थिति में 27 दिसंबर से अनशन करने समेत भविष्य की अन्य योजनाओं पर कोर कमेटी ने विचार विमर्श किया. अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘संसद में किस तरह के लोकपाल विधेयक को पारित किया जाता है उस पर अनशन का निर्णय होगा. उस आधार पर अन्ना 27 दिसंबर को अनशन पर बैठेंगे. जो भी हो, उस दिन लोग इकट्ठे होंगे. यह अनशन हो सकता है या संसद से निकलने वाले परिणाम के आधार पर जश्न हो सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘इस समय दिल्ली के मौसम को देखते हुए हमने मुंबई के आजाद मैदान के लिए भी आवेदन किया है. यदि उस दिन दिल्ली में मौसम सही रहा तो प्रदर्शन या जश्न दिल्ली में होगा.’ कोर कमेटी ने यह फैसला भी किया कि जिस दिन संसद में लोकपाल विधेयक को रखा जाएगा उनके सदस्य संसद की दर्शक दीर्घा में बैठकर कार्यवाही देखेंगे.

उधर अन्ना हजारे ने अलग से सिटीजन चार्टर लाने के सरकार के प्रस्ताव में आज यह कहते हुए खोट निकाला कि यह संसद की ओर से उन्हें दिये गए आश्वासन के खिलाफ है. हजारे ने इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से अनुरोध किया कि वह लोकपाल के मुद्दे पर संप्रग सरकार पर वैसे ही दबाव बनायें जैसा कि उन्होंने खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर बनाया था. हजारे ने संवाददाताओं से कहा, ‘सिटीजन चार्टर को अलग कानून के रूप में नहीं पेश किया जाना चाहिए. जब संसद ने अपना निर्णय दे दिया है तो उसके लिए अलग विचार देने की क्या आवश्यकता है। यह सही नहीं है.’ उन्होंने बैठक से पहले कहा, ‘लोकपाल पर चर्चा करने के लिए कल कैबिनेट की बैठक हुई थी. बैठक के दौरान कैबिनेट ने सिटीजन चार्टर को अलग कानून बनाने पर चर्चा की जिसके बारे में मेरा मानना है कि पूरी तरह से गलत है.’ उन्होंने कहा, ‘यह गलत है क्योंकि जब मैं रामलीला मैदान में अनशन कर रहा था तब प्रधानमंत्री ने मुझे पत्र लिखकर यह आश्वासन देते हुए अनशन समाप्त करने को कहा था कि तीन महत्वपूर्ण बिंदु सिटीजन चार्टर, निचली नौकरशाही और राज्य लोकायुक्त विधेयक का हिस्सा होंगे और संसद ने इससे सहमति जतायी थी.’ हजारे ने कहा कि एफडीआई के मामले में ममता बनर्जी ने शानदार कार्य किया. उनके निर्णय ने कई छोटे व्यापारियों को बचा लिया. हमारा अनुरोध है कि भ्रष्टाचार का एक बड़ा खतरा झेल रहे देश को लोकपाल मिलना चाहिए जो कि इसे 100 प्रतिशत नहीं तो 60 से 70 प्रतिशत तो मिटा ही सकता है.

उन्होंने कहा, ‘हमारा ‘बहन’ ममता से यही अनुरोध है कि आपको लोकपाल के लिए कुछ अच्छे शब्द आगे रखने चाहिए ताकि भ्रष्टाचार को कुछ सीमा तक मिटाया जा सके.’ टीम अन्ना सीबीआई को लेकर सरकार की योजना से असंतुष्ट दिखाई दी. इसके सदस्यों ने सीबीआई के उस रुख का समर्थन किया जिसमें एजेंसी ने लोकपाल से जुड़े अनेक मुद्दों पर अप्रसन्नता जाहिर की है. टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम सीबीआई के विरोध का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि स्थायी समिति की रिपोर्ट खतरनाक है और इसे खारिज किया जाना चाहिये.’ सीबीआई ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को पत्र लिखकर कहा कि किसी मामले को सीबीआई को दिये जाने से पहले उसकी लोकपाल द्वारा प्रारंभिक जांच किये जाने को अनिवार्य बनाये जाने का प्रस्तावित कदम भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ एजेंसी के प्रभावशीलता को ‘गंभीर रूप से नुकसान पहुंचायेगा.’ पत्र के मुताबिक वर्तमान समय में एजेंसी विभिन्न स्रोतों से सूचना इकट्ठे करती है, योजना बनाती है और दस्तावेजों एवं साक्ष्यों को हासिल करने के लिये तलाशी अभियान चलाती है. पत्र में कहा गया है कि यदि लोकपाल द्वारा प्रारंभिक जांच को आवश्यक बना दिया जाता है और सिफारिशों को लागू कर दिया जाता है तो एजेंसी अपने इस तरह के तलाशी अभियान खो देगी.

अन्ना टीम का सीबीआई की दलील को समर्थन

लोकपाल से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर असहमति जता चुकी सीबीआई को बुधवार को टीम अन्ना का समर्थन मिल गया जिसने कहा कि संसद की स्थाई समिति के सुझाव खतरनाक हैं और इसे खारिज किया जाना चाहिए.  टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने  कहा कि हम सीबीआई के विरोध का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि स्थाई समिति की रिपोर्ट खतरनाक है और इसे खारिज किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि सिफारिशों को लागू किया गया तो इससे सीबीआई की कार्यप्रणाली पंगु हो जाएगी. केजरीवाल ने कहा कि सभी मामलों के लिए प्रारंभिक जाच अनिवार्य कर दिए जाने से भ्रष्ट लोगों को यह पता चल सकता है कि वे सीबीआई की नजर में हैं और छापा पडऩे से पहले ही वे खुद को बचा सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम सीबीआई की दलील का समर्थन करते हैं और वे सिफारिशों का सही विरोध कर रहे हैं. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार हजारे के अभियान का इस्तेमाल सीबीआई की भूमिका को हल्का करने के लिए कर रही है. केजरीवाल का बयान ऐसे समय पर आया है जब सीबीआई ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को पत्र लिखकर कहा कि किसी मामले को सीबीआई को दिए जाने से पहले उसकी लोकपाल द्वारा प्रारंभिक जाच किए जाने को अनिवार्य बनाए जाने का प्रस्तावित कदम भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ एजेंसी की प्रभाविकता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाएगा. पत्र में कहा गया है कि यदि लोकपाल द्वारा प्रारंभिक जाच को आवश्यक बना दिया जाता है और सिफारिशों को लागू कर दिया जाता है तो एजेंसी अपने स्तब्ध कर देने वाले तत्व यानि की इस तरह के तलाशी अभियान चलाने को खो देगी.

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