नई दिल्ली. 27 दिसंबर. सरकार ने लोकपाल बिल में जानबूझकर कर ऐसी चीजें रखी हैं जिससे यह संसद में लटक जाए या फिर बाद में कानूनी अड़चन आ जाए. उन्होंने कहा कि विवाद बढ़ाने के लिए लोकपाल बिल के ड्राफ्ट में अल्पसंख्यक आरक्षण जानबूझ कर डाला गया है.

-यशवंत सिन्हा, बीजेपी

द्रौपदी के पांच पति थे , सीबीआई के नौ पति होने जा रहे हैं. इससे पूरा तंत्र अस्त-व्यस्त हो जाएगा. पूर्व सांसद को सात साल के बाद लोकपाल के दायरे में लाने की धाराएं बेहद खतरनाक है. उन्होंने अपने भाषण में अन्ना हजारे , अरविंद केजरीवाल और किरन बेदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें आंदोलन के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश नजर आ रही है.
-लालू प्रसाद यादव, आरजेडी

लोकपाल बिल पर सरकार को विपक्ष ही नहीं अपने सहयोगी दलों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. बिल पर बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के मौजूदा लोकपाल बिल का विरोध किया. तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि राज्य की शक्तियों को कम करने वाले बिल के ड्राफ्ट का वह विरोध करते हैं.
-तृणमूल कांग्रेस

लोकतंत्र के चारों स्तंभ अभी सुरक्षित हैं, ऐसे में लोकतंत्र के पांचवें स्तंभ (लोकपाल) की जरूरत नहीं है. उन्होंने लोकपाल के दायरे में पीएम को लाने और लोकसभा के स्पीकर को लोकपाल के प्रति जवाबदेह बनाने पर सख्त ऐतराज जताया.  सरकार मौजूदा लोकपाल बिल को वापस ले और स्टैंडिंग कमिटी में भेजे.
-अनंत गीते, शिवसेना सांसद

यह सरकारी लोकपाल बिल भारतीय संविधान के मुताबिक नहीं है. सरकार बिल को लेकर कन्फ्यूज है. यह कानून अनुच्छेद 253 के तहत लाया गया है, जो देश के संघीय ढांचे पर चोट है. अगर यह बिल इसी स्वरूप में पास हो गया तो राज्यों के अधिकार में दखल होगा. सरकार राज्यों पर लोकायुक्त थोप रही है. सुषमा स्वराज ने कहा हमें इसमें आरक्षण पर भी ऐतराज है.
-सुषमा स्वराज , बीजेपी

चुनावी चश्मे से लोकपाल बिल को नहीं देखना चाहिए. लोकपाल में अल्पसंख्यक आरक्षण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीएसपी लोकपाल के दायरे में पीएम और सीबीआई को लाने के पक्ष में है.
-दारासिंह चौहान, बीएसपी

लोकपाल बिल पर जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि लोकायुक्त पर राज्य के अधिकार में दखल दे रही हैं सरकार.
-शरद यादव, नेता, जेडीयू

लोकायुक्त के गठन का विषय राज्यों का है. राज्यों को प्रदान किए गए अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए.
-टी.के.एस. इलनगोवन , डीएमके

इस संदर्भ में एक सशक्त लोकपाल का गठन किया जाना चाहिए और राज्यों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए , क्योंकि लोकायुक्त के गठन का प्रस्ताव संघीय ढांचे पर प्रहार है. उन्होंने कहा कि लोकपाल की अपनी जांच एजेंसी होनी चाहिए अन्यथा यह बेअसर हो जाएगा. सरकार को इस बारे में खुले मन से विचार करना चाहिए. 1991 में देश में आर्थिक सुधार लागू किए जाने के बाद भ्रष्टाचार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है. इसको ध्यान में रखते हुए कॉर्पोरेट घरानों को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए. इसके साथ ही सीबीआई को सरकारी प्रभाव से मुक्त बनाए जाने की जरूरत है.
बासुदेव आचार्य , सीपीएम

इस बिल में लोकपाल कितना मजबूत है , यह सवालों के घेरे में है. यह बिल करप्शन को मिटाने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों की उम्मीदों से परे है.  लोकायुक्त का विषय राज्यों का अधिकार है , लेकिन इस संबंध में विधेयक में जो प्रावधान किया गया है वह राज्यों की स्वायत्ता पर चोट करता है.
भृतुहरि माहताब , बीजेडी

हालांकि ओडि़शा सरकार तीन महीने के भीतर राज्य में सशक्त लोकायुक्त के गठन की प्रतिबद्धता व्यक्त करती है.

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