पांच दिन पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी किए गए निर्यात प्रतिबंध के आदेश के खिलाफ दो प्याज निर्यातक समूहों ने बंबई उच्च न्यायालय में याचिकाएं  दायर की हैं. इन दोनों मामलों की सुनवाई 20 और 21 सितंबर को होगी.

मुंबई.. ये प्याज निर्यातक उस खेप के लिए अंतरिम राहत की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए सरकार द्वारा पहले ही अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जा चुके हैं और यह माल बंदरगाहों पर कंटेनरों में भराई के विभिन्न चरणों में है। याचिका दायर करने वाले  निर्यातक ने बताया कि हमने सीमा शुल्क आयुक्त और डीजीएफटी को पक्षकार बनाया है। न्यायालय ने बुधवार को पहली बार सुनवाई की। अंतिम सुनवाई 21 सितंबर को होगी और उसी दिन आदेश जारी किया जाएगा।

शहरी क्षेत्रों में खुदरा कीमतें बढऩे के कारण डीजीएफटी ने 9 सितंबर को सभी प्रकार के प्याज निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। यह कदम न्यूनतम निर्यात कीमत में अचानक 175 डॉलर की वृद्धि कर इसे 375 डॉलर प्रति टन करने के एक दिन बाद उठाया गया। कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने वास्तविक स्थिति का जायजा लिए बिना जल्दबाजी में यह निर्णय लिया है।
इतने जल्द प्रतिबंध नहीं लगाने की उम्मीद थी। इसके कारण वे विदेशी कारोबारियों विशेष रूप से दुबई, के साथ 45,000 टन प्याज के अनुबंध कर चुके थे। ये कारोबारी निर्यात के विभिन्न चरणों में थे,इनमें से लगभग सभी को सीमा शुल्क विभाग और अन्य नियामकीय प्राधिकरणों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मिल चुके थे।

एक निर्यातक ने कहा कि ‘हम अनुबंधों को पूरा करने के लिए 2,600 टन प्याज कंटेनरों में भरने के लिए पहले ही बंदरगाह पर भेज चुके थे। निर्यात प्रतिबंध से न केवल निर्यात पर चोट पहुंची है, बल्कि इस प्याज को वापस गादामों में पहुंचाने की लागत का बोझ उन्हें उठाना पड़ा है।’ मामला दर्ज कराने वाले दूसरे निर्यातक ने कहा कि इससे विश्व में भारत की छवि खराब हुई है। किसी भी समय प्रतिबंध लगने की संभावना के कारण भविष्य में कोई भी आयातक हम पर विश्वास नहीं करेगा।  वहीं, बुधवार को दूसरे दिन भी नासिक मंडी बंद रही। लेकिन वाशी कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) बाजार में कीमतें सीमित दायरे में ही रहीं। यहां अच्छी किस्म की प्याज का भाव 11-12 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। वाशी एपीएमसी में प्याज की कीमतें सामान्य हैं। हालांकि खुदरा बाजार में कीमतें पिछले कुछ दिनों में दुगुनी 22-24 रुपये प्रति किलोग्राम हो चुकी हैं।
कई छुट्टियां होने की वजह से गोदामों से हाजिर मंडियों में सभी जिंसों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।  उन्होंने कहा कि नया फसल सीजन अक्टूबर के अंत तक शुरू होने की संभावना है और उपभोक्ताओं को करीब एक महीने और जिंसों की तेज कीमतों का सामना करना पड़ेगा। कम कीमतों से स्टाकिस्ट स्टॉक करने से परहेज करेंगे, जिससे प्याज की कीमतें फसल की कटाई के समय 2 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ सकती हैं. देश में नाशिक के प्याज की आपूर्ति में 30 फीसदी योगदान होता है।

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