अखिल भारतीय संपादक सम्मेलन

पुड्डुचेरी, 10 फरवरी. ग्रामीण विकास संगठन मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि माओवादी हिंसा से निपटने के लिए सरकार लोगों पर आधारित बहुआयामी  रणनीति पर काम कर रही है. एक साथ कई नीतियों पर काम कर रही है. वे पुंडुचेरी में अखिल भारतीय संपादकों के सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने आगे कहा कि केवल पुलिस पर आधारित होकर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटना  सफल नहीं हो पा रहा है. माओवादी हिंसा से निपटने के लिए ग्रामीणों से सीधी बात करनी होगी और उनकी चिंताओं का समाधान करना होगा. इसके साथ ही वहा राजनीतिक गतिविधियों को भी बढ़ाना होगा. उन्होंने पश्चिम बंगाल के जंगल महल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राजनीति गतिविधियों ने माओवादियों को एक सीट वापस लेने पर मजबूर कर दिया है. इसके लिए उन्होंने ममता बनर्जी की खुली प्रशंसा की. उन्होंने कहा, पुलिस और अर्ध सैनिक बलों के माध्यम से सुरक्षा उपाय करने के अलावा लोगों पर केंद्रित कल्याण के उपाय व बेहतर और संवेदनशील प्रशासनिक तंत्र अन्य आवश्यक नक्सली चुनौती से निपटने के तरीके हैं. नक्सली हिंसा  देश के 78 जिलों में गहरी जड़ें जमा चुकी है इससे निपटने के लिए समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करनी होगी. श्री रमेश ने कहा राजनीति और विकास की विफलता हिंसा में बढ़ोत्तरी के कारण थे. केंद्र ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का पुनर्नियोजन और पुनर्गठन करेगा तथा उन्हें आम आदमी विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाएगा.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायण सामी ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में चोरी की जांच के लिए एक आसान तंत्र विकसित किया जाना चाहिए. मीडिया से इस संबंध में सुझाव मांगते हुए उन्हों कहा कि चौथी स्तंभ के रूप में उन्हें केवल सरकार की आलोचना करने के लिए ही सीमित रहना चाहिए, बल्कि सकारात्मक उपलब्धियों को उजागर करना चाहिए. पांडिचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी ने लोगों के कल्याण के लिए राज्य में शुरू किए गए विभिन्न विकासात्मक उपायों पर प्रकाश डाला. उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय विचार विमर्श रचनात्मक योजनाओं और निर्णय पर एक पूर्ण तरीके में सामाजिक बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान आकर्षित करेगा. पुडुचेरी के राज्यपाल डॉ. इकबाल सिंह ने कहा कि मीडिया समाज में हो रहे विकास कार्यो की सूचना देकर प्रजातंत्र को बनाए रखता है. संपादकीय स्वतंत्रता लोगों की रूचि को आवाज देने का एक अनिवार्य पहलू है. प्रेस सूचना कार्यालय की प्रधान महानिदेशक सुश्री नीलम कपूर ने कहा, सामाजिक क्षेत्र के मुद्दों पर इस प्रकार के सम्मेलन मीडिया के प्रतिनिधियों को नीति निर्माताओं के साथ बातचीत के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते है.

छाए रहे मप्र के मुद्दे

  •   टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में जलधारा योजना में सरपंचो व अधिकारियों द्वारा किया गया भरी भ्रष्टाचार
  •   एम.पी. में नक्सलवाद
  •   झाबुआ का वाटॅरशेड कार्यक्रम
  •   दक्षिण के मुकाबले एम.पी. का पिछड़ापन
  •   एम.पी. की नदी पुनर्जीवन योजना

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