भोपाल, 19 मई. शासन की मंशा समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को प्रथम पंक्ति में खड़ा करना है. ये दबे, कुचले, पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों का उत्थान बिना शासकीय सहायता के संभव नहीं है.

आजादी के बाद शासन ने आरक्षित वर्गो के सभी क्षेत्रों से जुड़े लोगों खासकर अनसूचित जाति/जनजाति के लोगों के उनके आर्थिक विकास, सामाजिक समानता, शिक्षा, कृषि और अन्य क्षेत्रों के जोडऩे का प्रयास किया किंतु कतिपय लोगों ने शासन की उक्त मंशा को दरकिनार करने में सर्वप्रथम शासन में घुसपैठ की ओर व्यापक रूप से शासन की योजनाओं एवं  सुविधाओं का दोहन कर अनसूचित जाति/अनसूचित जनजाति तथा पिछडï वर्गो की पहुंच से दूर रखा. इस कारण शासन ने उक्त आरक्षित वर्गो के लिये शासन में भागीदारी उनकी जनसंख्या के अनुपातिक आधार पर बने अपनी शुरू की आरक्षण व्यवस्था के आधार पर राजनीति क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र, सामाजिक समानता के क्षेत्र पंचायत, नगर निगम कृषि मंडी सहित अन्य शासकीय दफ़्तरों में आरक्षित वर्गो के विकास के लिये आरक्षण प्रावधान का पालन करने अधिनियम एवं नियम विधान मण्डल, संसद में बनाकर लागू किया है. यह इस कारण आवश्यक हुआ कि आरक्षित वर्गो को सामान्य दर्जे में लाकर उन्हें संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो सके.

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