मध्यप्रदेश में भाजपा की मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने राज्य को जैविक कृषि का राज्य बनाने की घोषणा काफी पहले कर दी है, लेकिन हाल में मुख्यमंत्री ने स्वयं दिल्ली जाकर राज्य में रासायनिक खादों में भारी कमी का प्रश्र उठाया था. राज्य के किसान इस समय भी रासायनिक खादों की कमी महसूस कर रहे हैं. निदान के तौर पर यूरिया में जैविक खाद मिश्रण की भी बात कही जा रही है. इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि राज्य में अभी जैविक कृषि को लागू करने में गति नहीं आई है.

राज्य की जैविक कृषि नीतियों संसाधन प्रबंधन, तकनीकी विकास और व्यापक प्रचार-प्रयास, उत्पादन वृद्धि के लिये प्रभावी अनुसंधान उन्नत राज्यों के समकक्ष उपज वृद्धि प्राप्त करने के लक्ष्य हैं. नीति-निर्धारण में यह महसूस किया गया कि रासायनिक खादों के मूल्य में लगातार वृद्धि होती जा रही है. इसके साथ ही इनकी मांग के अनुसार पूर्ति नहीं हो पा रही है. इसकी वजह से खेती की लागत भी बढ़ रही है और उपज में कमी आ जाती है. किसानों व शासन के समक्ष ये दो बड़ी कृषि समस्याएं हर साल सामने आ रही हैं. इस परेशानी से निपटने के लिये एकमात्र रास्ता यही है कि राज्य की कृषि को जैविक खादों पर आधारित जैविक खेती बना दिया जाए.

इस नीति से उत्पादन से लेकर आहार तक के सिद्धान्त को समाहित कर स्वास्थ्यवद्र्धक भोजन को भरपूर उपलब्ध कराना है. इसके उद्देश्यों में वर्तमान कृषि प्रणाली में कृषि निवेश पर आय में वृद्धि करने के लिये कृषि लागत को कम करना और नकद आय में वृद्धि कर खेती को लाभ का धंधा बनाना है. अब मध्यप्रदेश में भी रसायनों से मुक्त जैविक सब्जियां व अनाज मिल सकेंगे. केन्द्र के कृषि विभाग की स्वायत्त संस्था ‘एपिडा’ (एग्रीकल्चरल एन्ड प्रोसेस फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट आथेरिटी) ने राज्य के कृषि विभाग की एजेन्सी को जैविक खाद्य पदार्थों पर एपिडा मार्क स्वीकृत करने का अधिकार दे दिया है. ‘आईएसआई’ और ‘एगमार्क’ की तरह ‘एपिडा’ मार्क लेबिल का अर्थ होगा कि पैकेट का माल जैविक है.

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