अब राज्य में लगभग खाद्यान्न, दलहन, तिलहन की सभी फसलें सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने लगी है. इसी से किसानों को व्यापारियों की गोलबंदी कर फसल आने के वक्त भाव कम रखकर शोषण से मुक्ति मिल गई. इसमें खेती में लाभ की स्थिति आ गई है और उत्पादन भी बढ़ा है. गत रबी में राज्य सरकार ने 100 रुपये का अतिरिक्त बोनस देकर लक्ष्य से ज्यादा 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी थी.

इन दिनों राज्य में धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी चल रही है. अब राज्य में धान की खेती भी बड़े पैमाने पर की जा रही है. दलहन का क्षेत्र भी काफी बढ़ गया है. राज्य सरकार मौजूदा सीजन में साढ़े पांच लाख टन धान खरीदेगा. इस पर 50 रुपया प्रति क्विंटल बोनस किसानों को दिया जायेगा. पिछले साल साढ़े 21 लाख रुपये का बोनस दिया गया था. राज्य में बोई गई धान की सभी औसत अच्छी किस्में सरकार खरीद रही है. इस खरीदी में 2 लाख 80 हजार टन धान राज्य नागरिक आपूर्ति निगम और 2.70 लाख टन सहकारी विपणन संघ के माध्यम से होगा. इस साल किसानों ने धान ज्यादा रकबे में बोई है और सरकार ने भी ज्यादा उपज खरीदने के लिये इस साल खरीदी को 28.50 प्रतिशत बढ़ाया है. पिछले साल 428 लाख टन खरीदी थी, जो इस साल एक लाख मीट्रिक टन बढ़ा दी गई है. इस बार खरीदी प्रारंभ होते ही सभी 591 केंद्रों पर इसे खरीदा जा रहा है. सरकार भंडारण के क्षेत्र में भी पूरी तौर पर सक्रिय होगई है. अब समर्थन मूल्य पर खाद्यान्नों व अन्य फसलों की खरीदी एक स्थाई व्यवस्था बन गई है. पहले व्यापारियों की खरीद स्थाई चलन था और सरकार यदाकदा भाव बहुत गिर जाने पर अनाज खरीदती थी. इसलिये सरकार के भंडार गृह निगम के गोदाम उसी के अनुरूप काफी कम रहे हैं. अब भंडारण और  परिवहन का काम भी खरीदी के अनुपात में व्यापक हो गया है. सरकार ने निजी क्षेत्र को भी भंडार गृह निर्माण के लिये प्रोत्साहित किया है. सरकार उन्हें नियमित रूप से किराये की गारंटी के साथ लेती रहेगी. इसके साथ ही अनाजों के गोदाम बनाने के लिये प्राथमिक सहकारी समितियों को नि:शुल्क भूमि देने का निर्णय ले लिया है.

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