वाशिंगटन, 12 फरवरी.  पाकिस्तान के एक नामचीन लेखक और इस क्षेत्र पर निगाह रखने वाले अहमद राशिद ने अपनी नई किताब में दावा किया है कि चीन के लिए पाकिस्तान भले ही एक सर्वकालिक सहयोगी हो लेकिन बीजिंग भारत के साथ दुश्मन की तरह व्यवहार करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह कभी नहीं चाहेगा कि नई दिल्ली के साथ उसका 60 अरब डालर का विशाल व्यापार संकट में पड़े.

राशिद ने अपनी किताब पाकिस्तान ऑन द ब्रिंक : द फ्यूचर ऑफ अमेरिका, पाकिस्तान एंड अफगानिस्तान में कहा है कि आर्थिक महत्व का मतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय तक भारत के खिलाफ पूर्ण या बिना शर्त समर्थन के लिए चीन पर विश्वास नहीं कर सकता. यह किताब 19 मार्च को बाजार में आ जाएगी. 230 से अधिक पृष्ठों की इस किताब में राशिद ने लिखा है कि उभरते हुए भारत को संतुलित करने के लिए चीन, पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंध चाहता है और पाकिस्तान ने इसे मुहैया कराने कीच्इच्छा जताई है. राशिद ने लिखा है कि चीन, भारत के साथ दुश्मन की तरह व्यवहार करने के लिए तैयार नहीं है जैसा कि पाकिस्तान उससे अपेक्षा रखता है. इसके बजाय चीन दोनों देशों से चाहता है कि वे शाति के साथ रहें न कि छद्म युद्ध की स्थिति में.

किताब में राशिद ने लिखा है कि एक बार चीन ने कश्मीर पर पाकिस्तान की स्थिति का पुरजोर समर्थन किया था लेकिन 1990 के दशक के मध्य से यह ज्यादा बड़ा मामला नहीं रहा. राशिद ने कहा कि चीन का भारत के साथ करीब 60 अरब डालर का व्यापार और व्यवसायिक रिश्ता है. ऐसा अनुमान है कि अगले 10 साल में यह व्यापार छह गुना बढ़ सकता है. चीन, पाकिस्तान को पूर्ण और बिना शर्त समर्थन देकर इसे गंवाना नहीं चाहेगा. उन्होंने कहा कि कई पाकिस्तानी लोगों का मानना है कि यदि अमेरिका के साथ पाकिस्तान रिश्ता खत्म हो जाता है तो इससे हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई चीन कर सकता है. भूभागीय तौर पर चीन पाकिस्तान के करीब है, उसने पाकिस्तान की कुछ परियोजनाओं जैसे बाध, बंदरगाह और सड़कों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता भी दी है. साथ ही उसने पाकिस्तान के परमाणु हथियार और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों में भी मदद की है और उसकी सेना को अरबों डॉलर के टैंक, पोत, पनडुब्बिया और लड़ाकू विमान कम दरों पर दिए हैं. राशिद ने लिखा है कि लेकिन चीन पाक संबंधों में लोगों के बीच कम, सेना के बीच अधिक नजदीकी है. दोनों देशों के बीच होने वाला नौ अरब डालर का व्यापार चीन के पक्ष में थोड़ा भारी पड़ता है.

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