• हो सकती है छ: माह की जेल

इस्लामाबाद, 13 फरवरी. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने, प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने से इंकार करने पर सोमवार को अवमानना के आरोपों में अभियोग लगाया. इससे गिलानी को अपने पद से इस्तीफा देने की नौबत आ सकती है.

59 वर्षीय गिलानी पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का अभियोग लगाया है. गिलानी ने हालांकि खचाखच भरे अदालत कक्ष में खुद को बेकसूर बताया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 फरवरी तक स्थगित कर दी. सुनवाई शुरू होने पर, सात न्यायाधीशों की पीठ की अगुवाई कर रहे न्यायमूर्ति नासिर उल मुल्क ने आरोपपत्र पढ़ा और प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या वह खुद पर लगाए गए आरोपों के बारे में जानते हैं और उन्हें समझते हैं. इस पर गिलानी ने जवाब दिया ‘हां, मैंने आरोपपत्र पढ़ा है और उसे समझा है.’ गिलानी के वकील ने जवाब देने के लिए 27 फरवरी तक का वक्त मांगा हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी जबकि सबूत 22 फरवरी को रिकॉर्ड होंगे.

वक्त इसलिए मांगा गया है कि क्योंकि गिलानी 21 फरवरी को लंदन जा रहे हैं. मामले में 27 और 28 फरवरी को पीएम गिलानी का बयान रिकॉर्ड किया जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई के दौरान गिलानी का आना जरुरी नहीं है. प्रधानमंत्री अपनी सफेद एसयूवी चला कर अपने आधिकारिक आवास से कुछ ही दूरी पर स्थित सुप्रीम कोर्ट गए. उनके साथ कई वकील थे. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह गिलानी की उन्हें अवमानना मामले के सिलसिले में जारी किए गए सम्मन के विरोध में दाखिल अपील खारिज कर दी थी.

प्रधानमंत्री गिलानी कह चुके हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट उन्हें दोषी ठहराता है तो एक सांसद के तौर पर वह स्वत: ही संसद की सदस्यता के अयोग्य हो जाएंगे. गिलानी इससे पहले 19 जनवरी को अवमानना मामले की सुनवाई में पीठ के समक्ष पेश हुए थे. उनके साथ तब उनके वकील ऐतजाज एहसन थे. सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ऐतजाज एहसन देश के अग्रणी विधि विशेषज्ञों में से एक हैं. सुप्रीम कोर्ट सरकार पर दिसंबर 2009 से जरदारी के खिलाफ स्विटजरलैंड में धन शोधन के मामले फिर से खोलने के लिए दबाव डाल रहा है, जब उसने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा जारी आम माफी के मसौदे को रद्द कर दिया था, जिसके जरिये राष्ट्रपति तथा 8,000 अन्य को फायदा हुआ था.

पीपीपी जरदारी के खिलाफ मामले फिर से खोलने की इच्छुक नहीं है क्योंकि उसके शीर्ष नेताओं का मानना है कि स्विटजरलैंड में मामलों पर किसी भी कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट को, राष्ट्रपति को मिली छूट से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करने का अवसर मिल सकता है. अदालत ने कहा था कि कथित रूप से धनशोधन के जरिए गई 60 करोड़ डालर की राशि तभी वापिस आ सकती है यदि स्विस अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखा जाए. कानून के जानकारों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर गिलानी को छह माह की सजा हो सकती है और उन्हें संसद की सदस्यता से अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है.

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