पन्ना, 10 फरवरी. जैव विविधता से परिपूर्ण पन्ना जिले का विशाल वन क्षेत्र अब इस पिछड़े इलाके के लिए अभिशाप नहीं वरन वरदान बनेगा. प्रकृति के अनमोल उपहारों से समृद्ध यह जिला शिक्षा की रोशनी से महरूम रहा है, लेकिन शांति और सौन्दर्य के इस टापू को एजुकेशन हब के रूप में विकसित किये जाने के सार्थक प्रयास शुरू हो गये हैं. ईको टूरिज्म और आजीविका प्रदान करने वाली शिक्षा से इस पिछड़े इलाके में खुशहाली आयेगी.

उल्लेखनीय है कि आजादी के बीते 64 सालों में बुन्देलखण्ड क्षेत्र का पन्ना जिला विकास के मामले में अत्यधिक पिछड़ा रहा है. पन्ना जिलावासियों की इस पीड़ा को नवभारत ने 4 जनवरी 2012 के अंक में प्रमुखता से उठाया और यह सवाल किया कि विशाल वन क्षेत्र के बदले में पन्ना को क्या मिला ? यहां के लोगों की जिन्दगी से जुड़ी अहम समस्या का समाधान भी नवभारत ने सुझाया था, जिस पर ठोस और रचनात्मक पहल शुरू हो गई है. पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति ने अभिनव पहल करते हुए पन्ना के निकट मझगवां में म.प्र. जैव विविधता महाविद्यालय व प्रशिक्षण संस्थान खोले जाने की योजना बनाई है, जो इसी वर्ष मूर्त रूप ले सकता है. यह शैक्षणिक संस्था चयनित किये गये विश्व विद्यालय व मध्यप्रदेश वन विभाग तथा पन्ना टाइगर रिजर्व के संयुक्त तत्वाधान में संचालित होगी, जिसमें एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा. मालुम हो कि पूरे भारत में वन्य जीव से संबंधित स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा एवं सार्टिफिकेट कोर्स मात्र भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून एवं डा. उल्लास कारंत का दक्षिण भारत (बंगलौर) में स्थित संस्था या अलीगढ़ विश्वविद्यालय में उपलब्ध है.

जैव विविधता पर आधारित शिक्षा के अवसर असीमित हैं, अत: इस असीमित जैव विविधता आधारित शिक्षा को स्थानीय तौर पर वैकल्पिक स्थायी आजीविका के रूप में तब्दील करने की दिशा में प्रयास सराहनीय हैं. पन्ना टाइगर रिजर्व की अपार जैव विविधता, बाघों की विलुप्ति तथा बाघ पुर्नस्थापना योजना की सफलता और गिद्धों के उत्तम रहवास आदि सकारात्मक मुद्दों का समावेश करते हुए एनएमडीसी से उपलब्ध भवनों का उपयोग कर जैव विविधता विषय पर आधारित बीएससी, एमएससी, डिप्लोमा व सार्टिफिकेट कोर्स संचालित किया जा सकता है. प्रत्येक कोर्स में मात्र 20 सीट रखी जाना है जो कि राष्ट्रीय स्तर की चयन परीक्षा के माध्यम से चयनित किया जाना प्रस्तावित है. क्षेत्र संचालक श्री मूर्ति के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर अगले 3 माह की अवधि में 15 अथवा 30 दिन की वाइल्ड लाइफ सार्टीफिकेट कोर्स प्रारंभ किया जाकर शिक्षण संस्था का औपचारिक शुभारंभ किया जा सकता है. ऐसा करने से इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को लेकर पन्ना पार्क के संबंध में आम जनता के मन में जो सवाल हैं उनका समाधान होगा. यहां रोजगारोन्मुखी शिक्षा कार्यक्रम प्रारंभ होने से इस क्षेत्र के गुणात्मक विकास व खुशहाली के रास्ते खुल सकेंगे.

ऐसे होगा सपना साकार

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आर.श्रीनिवास मूर्ति ने बताया कि इस पूरे प्रस्ताव को साकार करने हेतु 2 करोड़ रू. की आवश्यकता होगी. उपरोक्त प्रस्तावित कोर्सों के संचालन हेतु हर वर्ष 25 से 50 लाख रू. का बजट चाहिए, जिसका 15 से 25 फीसदी हिस्सा फीस के रूप में मिल सकेगा. यदि इस प्रस्ताव की सैद्धान्तिक सहमति शासन स्तर से प्राप्त होगी तो इस पर अग्रिम कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित है.

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