भोपाल,31 जनवरी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज संपन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में शहरी गरीबों के लिये कल्याण योजना-2012 को मंजूरी दी गई है.

इस योजना से पथ पर विक्रय करने वाले गरीब परिवारों की आजीविका का संरक्षण होगा और शहरी क्षेत्रों में इसके लिये अधोसंरचना के विकास से उन लोगों को व्यवसाय करने के लिये स्थान प्राप्त हो सकेंगे. साथ ही शहरी क्षेत्रों में पथ विक्रेताओं को व्यवसाय का वैधानिक अधिकार मिल जाएगा. आज मंत्रालय में मंत्रि-परिषद के निर्णयों की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और मध्यप्रदेश शासन के प्रवक्ता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि पथ पर व्यवसाय करने वाले लोगों को क्रेडिट कार्ड दिये जायेंगे, उनके कौशल के उन्नयन की व्यवस्था की जायेगी तथा स्वर्ण जयंती योजना के लाभ भी उन्हें मिल सकेंगे. उन्होंने कहा कि इन व्यवसाइयों को निर्माण कार्य में संलग्न श्रमिकों के समान सुविधाएँ दी जाएँगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 तक सभी शेष हाथ ठेला चालकों को ठेले और रिक्शा चालकों को रिक्शे प्रदान किये जायेंगे. डा. मिश्रा ने बताया कि शहरों में हाकर्स कार्नर निर्धारित करने के लिये एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें मंत्रियों के अलावा हाथ ठेला चालकों और पथ पर विक्रय करने वाले लोगों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पथ पर विक्रय करने वालों की पंचायत बुलाकर उनके साथ सीधा संवाद किया था. इस संवाद के आधार पर यह योजना बनाई गई है, जिसे आज मंत्रि-परिषद ने मंजूर कर दिया. लघु वनोपज- मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज से अर्जित शुद्ध लाभ की 70 प्रतिशत राशि उनके संग्राहकों को देने का निर्णय लिया. अभी तक उन्हें 60 प्रतिशत राशि दी जाती थी. राज्य शासन द्वारा राष्ट्रीय लघु वनोपजों के व्यापार से होने वाली समस्त शुद्ध आय प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को हस्तातंरित की जाती है. वर्तमान में 60 प्रतिशत राशि संग्राहकों को वितरित की जाती है, 20 प्रतिशत राशि वनों के पुनरुत्पादन और लघु वनोपजों के विकास पर खर्च की जाती है और शेष राशि मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिये उपयोग में लाई जाती है. विगत पाँच वर्षों में क्रमश: 27.41 करोड़, 118.58 करोड़, 38.73 करोड़, 62.10 करोड़ तथा 82.57 करोड़ रुपये की राशि वनोपज संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में वितरित की गई है.

मंत्रि-परिषद द्वारा आज लिये गये निर्णय के फलस्वरूप लघु वनोपज से अर्जित शुद्ध आय की 70 प्रतिशत राशि संग्राहकों को वितरित की जायेगी, 15 प्रतिशत राशि वनों के पुरुत्पादन एवं लघु वनोपज प्रजातियों के विकास पर खर्च होगी तथा शेष राशि ग्राम के अधोसंरचना विकास एवं संग्राहकों के कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उपयोग की जायेगी. उल्लेखनीय है कि लघु वनोपजों का संग्रहण एवं विक्रय सुदूर वन-अंचलों में रहने वाले आदिवासियों एवं ग्रामीणों के लिये आजीविका का मुख्य साधन है. तेन्दूपत्ता, साल-बीज, कुल्लू गोंद राष्ट्रीयकृत हैं, जिनके संग्रहण और व्यापार पर राज्य शासन का एकाधिकार है.

1712 नये पद मंजूर
मंत्रि-परिषद ने विभिन्न विभागों में 1712 नये पदों के सृजन को मंजूरी दी. इनमें से 220 पद नर्सिंग सिस्टर के, 950 पद लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में चिकित्सा अधिकारी संवर्ग के, 162 पद विधि विभाग में, चार पद आयुष विभाग में, 334 पद पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में तथा 52 पद जेल विभाग में स्वीकृत किये गये. जेल विभाग में पद जनसंकल्प 2008 के अंतर्गत 100 बंदियों से अधिक संख्या वाली जेलों में परिरुद्ध बंदियों की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिये मंजूर किये गये. इनमें चिकित्सा अधिकारी के 18, मेल नर्स के 16 तथा कम्पाउडर के 18 पद शामिल हैं.

आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में विज्ञान को प्रोत्साहन
आदिवासी क्षेत्रों में आदिम-जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में विज्ञान को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये. इसके फलस्वरूप प्रत्येक हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल को विज्ञान मॉडयूल एवं नवाचार के लिये 10 हजार की वार्षिक सहायता राशि उपलब्ध करवाई जायेगी. यह सहायता पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल विभाग के ऐसे चिन्हित स्कूलों को भी दी जाएगी जहाँ आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे पढ़ रहे हैं. हायर सेकेण्डरी स्तर पर विज्ञान प्रोत्साहन के लिये विज्ञान क्लब, अध्ययन यात्राओं एवं विज्ञान की आवश्यक पुस्तकों एवं उपकरणों के लिए प्रत्येक आदिवासी विद्यार्थी को 2000 रुपये ग्यारहवीं कक्षा में विज्ञान प्रोत्साहन सहायता राशि के रूप में उपलब्ध करवाई जायेगी. स्कूल शिक्षा विभाग के ऐसे चिन्हित स्कूलों को भी यह सहायता मिलेगी जहाँ आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे पढ़ रहे हैं.

कक्षा 12वीं उत्तीर्ण आदिवासी विद्यार्थी को स्नातक विज्ञान (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स, बॉटनी, जूलॉजी) पाठयक्रम में प्रवेश के लिए प्रोत्साहन की दृष्टि से पाठ्यक्रम में प्रवेश पर प्रथम वर्ष में 3000 रुपये विज्ञान स्नातक प्रोत्साहन राशि दी जायेगी. प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में पदस्थ एमएससी योग्यताधारी संविदा शिक्षक/अध्यापक/शिक्षकों को अपनी शाला से अतिरिक्त हायर सेकेण्डरी विद्यालय में विज्ञान विषय का अतिरिक्त अध्यापन करने पर अतिथि शिक्षक के निर्धारित मानदेय का 50 प्रतिशत मानदेय दिया जायेगा.

अनूपपुर में भू-अर्जन पुनर्वास योजना
मंत्रि-परिषद ने मेसर्स वेलस्पन एनर्जी प्रायवेट लि. कंपनी की अनूपपुर की ताप विद्युत परियोजना के लिये किए गए निजी भूमियों के भू-अर्जन के संबंध में विस्थापितों/प्रभावितों को प्रतिकर के अलावा पुनर्वास नीति के अंतर्गत विशेष सुविधाएँ और सहायता भी देने का निर्णय लिया. अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के भूमिस्वामी को 22 हजार रुपये का एकमुश्त पुनर्वास अनुदान दिया जायेगा. छोटे एवं सीमांत कृषक को एकमुश्त 16 हजार रुपये तथा अन्य वर्ग के किसान को 11 हजार रुपये की राशि दी जाएगी. प्रत्येक कृषक को उसकी अर्जित भूमि के लिये प्रति एकड़ के मान से इतनी अतिरिक्त राशि विशेष पुनर्वास अनुदान के रूप में दी जायेगी कि उसे देय प्रतिकर को मिलाकर अर्जित भूमि के लिये 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्राप्त हो जाये. भूमिहीन विस्थापित परिवार को एकमुश्त 22 हजार रुपये की राशि विशेष आर्थिक अनुदान के रूप में दी जायेगी. भूमिहीन के अतिरिक्त अन्य श्रेणी के ऐसे विस्थापित परिवार, जो शासकीय भूमि पर विगत तीन वर्ष या उससे अधिक समय से अतिक्रामक के रूप में कृषि कार्य करता रहा है, को एक लाख 10 हजार रुपये प्रति एकड़ के मान से पुनर्वास अनुदान देय होगा. एक एकड़ से कम के ऐसे किसान को न्यूनतम एक लाख रुपये देय होगा.

इसके अलावा विस्थापन के परिणामस्वरूप घरेलू सामान अन्यत्र ले जाने के लिए कम्पनी द्वारा 25 किमी तक की दूरी तक नि:शुल्क परिवहन सुविधा दी जायेगी और विस्थापित परिवार को 5 हजार रुपये प्रति विस्थापित परिवार परिवहन व्यय भी दिया जायेगा. परियोजना के लिये अधिग्रहण में आने वाले आवासीय भवनों के विस्थापितों को भू-खण्ड एवं आवास निर्माण के लिये एक लाख रुपये का एक मुश्त अनुदान देय होगा. नीति में विस्थापितों के लिये नियमित रोजगार, स्वरोजगार प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्क में छूट संबंधी प्रावधान भी किये गये हैं. कंपनी की ओर से विस्थापित परिवारों के बालक-बालिकाओं को छात्रवृत्तियाँ भी दी जाएँगी. मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश पुलिस में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सिपाहियों को विशेष सहयोगी पुलिस के रूप में अनुबंधित करने के संबंध में संशोधन को मंजूरी दी. अब इस बल में भर्ती सभी भूतपूर्व सैनिकों के लिये खुली रहेगी. फिलहाल इन्फेन्ट्री, आर्टिलरी, आर्मर्ड कोर और इंजीनियर्स के भूतपूर्व सैनिकों की भर्ती का ही प्रावधान है, जिसे हटा लिया गया. इस तरह अब थल, वायु और नौ सेना के सभी भूतपूर्व सैनिक भर्ती के पात्र होंगे. वर्तमान में जो विशेष सहयोगी पुलिस दल भर्ती केन्द्र निर्धारित हैं, उनके अतिरिक्त दो और भर्ती केन्द्र भिण्ड और मुरैना में खोलने का निर्णय लिया गया. यह निर्णय इन दोनों जिलों में भूतपूर्व सैनिकों की अधिक संख्या के मद्देनजर लिया गया.

अन्य निर्णय
मंत्रि-परिषद ने इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में एक-एक परिक्षेत्रीय उप महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय प्रारंभ करने का निर्णय लिया. आवश्यकतानुसार नये उप पंजीयक कार्यालय शुरू करने के लिये मापदण्ड का निर्धारण भी किया गया. मंत्रि-परिषद ने सासन पावर लिमिटेड को पावर परियोजना की स्थापना के लिये कॉरीडोर (ऐश पाइप लाईन) निर्माण के लिये सिंगरोली जिले के ग्राम सिद्धिखुर्द में आवंटित करने के लिये 0.28 हेक्टेयर शासकीय भूमि ऊर्जा विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया.

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